रेलवे में मिशन मोड भर्ती: 2014 से जून 2026 तक 5.56 लाख युवाओं को मिला रोजगार

नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने मिशन मोड में भर्ती अभियान चलाते हुए वर्ष 2014 से 30 जून 2026 तक 5.56 लाख से अधिक पदों पर नियुक्तियां कर देश के सबसे बड़े रोजगार प्रदाताओं में अपनी भूमिका को और मजबूत किया है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में यह जानकारी देते हुए बताया कि इनमें दक्षिण रेलवे में 50,485 भर्तियां भी शामिल हैं।

रेल मंत्री ने बताया कि भारतीय रेलवे में रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया लगातार जारी रहती है ताकि परिचालन, सुरक्षा और तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप पर्याप्त जनशक्ति उपलब्ध कराई जा सके। भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, तेज और व्यवस्थित बनाने के लिए 2024 से वार्षिक भर्ती कैलेंडर भी लागू किया गया है।

दो वर्षों में करीब 4.5 करोड़ अभ्यर्थियों ने दी परीक्षा

रेल मंत्री के अनुसार 2024 और 2025 के भर्ती चक्र में रेलवे भर्ती बोर्ड (आरआरबी) की कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं (सीबीटी) में करीब 4.5 करोड़ अभ्यर्थियों ने भाग लिया। भर्ती परीक्षाएं देश के 150 से अधिक शहरों में 15 भाषाओं में आयोजित की गईं, जिससे दूर-दराज के क्षेत्रों के युवाओं को भी समान अवसर मिल सके।

92 हजार से अधिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया तेज

वर्ष 2024 के भर्ती कैलेंडर के तहत 92,116 रिक्तियों के लिए 10 केंद्रीकृत रोजगार अधिसूचनाएं जारी की गईं। इनमें सहायक लोको पायलट (एएलपी), तकनीशियन, जूनियर इंजीनियर, आरपीएफ, पैरामेडिकल, एनटीपीसी, मंत्रालयिक एवं पृथक श्रेणियां तथा लेवल-1 के पद शामिल हैं। इन पदों के लिए प्रथम और द्वितीय चरण की परीक्षाएं सफलतापूर्वक पूरी की जा चुकी हैं।

वहीं 2025 के भर्ती कैलेंडर के तहत 51,970 पदों तथा 2026 के लिए 17,803 पदों पर भर्ती प्रक्रिया भी जारी है।

रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया जारी

रेल मंत्रालय ने बताया कि वर्तमान में भारतीय रेलवे में 1,61,889 गैर-राजपत्रित रिक्त पदों पर भर्ती की प्रक्रिया वार्षिक कैलेंडर के अनुसार चल रही है। इसके अलावा 30 जून 2026 तक 3,300 से अधिक उम्मीदवारों के चयन पैनल को अंतिम रूप दिया जा चुका है, जिनमें अधिकांश पद सुरक्षा श्रेणी से संबंधित हैं।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि रेलवे की भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, तकनीक आधारित और मेरिट पर आधारित है। वार्षिक भर्ती कैलेंडर लागू होने से युवाओं को हर वर्ष नियमित अवसर मिल रहे हैं, परीक्षाओं की निश्चितता बढ़ी है और भर्ती से लेकर नियुक्ति तक की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज और सुव्यवस्थित हुई है।