* सुभाष नगर में " किरदार-ए-दस्तार " दुमाला प्रतियोगिता का आयोजन*

नई दिल्ली। सुभाष नगर स्थित गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा में सिख विरासत, संस्कृति और गौरवशाली परंपरा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भव्य 'किरदार-ए-दस्तार' दुमाला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। यह प्रेरणादायक कार्यक्रम टीम दस्तार कोच दिल्ली एवं गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा की प्रबंधक कमेटी के संयुक्त तत्वावधान में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। प्रतियोगिता में बड़ी संख्या में बच्चों और युवाओं ने पूरे उत्साह के साथ भाग लेकर आकर्षक दस्तार (पगड़ी) एवं दुमाला सजाने की अपनी कला का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

कार्यक्रम के दौरान दस्तार कोच मनबीर सिंह, मंजीत सिंह, मनिंदर सिंह, गुरजीत सिंह, गुरमुख सिंह और गुरमीत सिंह ने पूरी प्रतियोगिता का अनुशासित एवं प्रभावशाली संचालन किया। प्रतिभागियों के उत्साह और उनकी प्रस्तुति ने उपस्थित संगत का मन मोह लिया।

इस अवसर पर अतिथि के रूप में नेशनल अकाली दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष परमजीत सिंह पम्मा तथा दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्य एवं गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा, सफदरजंग एन्क्लेव के अध्यक्ष मोहिंदर सिंह का सम्मान किया गया।

अपने संबोधन में परमजीत सिंह पम्मा ने कहा कि दस्तार केवल सिर पर बांधा जाने वाला वस्त्र नहीं, बल्कि सिख की पहचान, स्वाभिमान, अनुशासन और गुरु साहिबानों की अमूल्य देन है। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत चिंता का विषय है कि आज कुछ सिख युवा पगड़ी की जगह टोपी पहनने लगे हैं, जबकि हमारे गुरु साहिबानों ने दस्तार को सम्मान, साहस और आत्मसम्मान का प्रतीक बनाया है।

पम्मा ने कहा "हमें अपने बच्चों को बचपन से ही दस्तार का महत्व समझाना होगा। जो समाज अपनी पहचान और विरासत को संजोकर रखता है, वही आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनता है। ऐसे आयोजन युवाओं में आत्मविश्वास जगाने के साथ-साथ उन्हें अपनी संस्कृति और धर्म से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं।"

पम्मा ने आयोजकों की सराहना करते हुए कहा कि टीम दस्तार कोच दिल्ली और गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा किया जा रहा यह प्रयास अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार की प्रतियोगिताएं देशभर में आयोजित होनी चाहिए ताकि नई पीढ़ी अपने गुरु साहिबानों की शिक्षाओं, सिख इतिहास और दस्तार की गरिमा से जुड़ी रहे।

कार्यक्रम में कमेटी के सदस्यों एवं अन्य गणमान्य अतिथियों ने भी दस्तार की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए प्रतिभागियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन की प्रशंसा की। आयोजकों ने बताया कि ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य युवा पीढ़ी को सिख इतिहास, धार्मिक मूल्यों और गौरवशाली परंपराओं से जोड़ना है। कार्यक्रम का समापन गुरु मर्यादा के अनुरूप हुआ तथा सभी प्रतिभागियों और संगत ने गुरु घर का आशीर्वाद प्राप्त किया।