* MND/ALS से पीड़ित मरीजों के लिए उम्मीद का एक नया दौर शुरू किया *

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), भोपाल के आयुष विभाग एवं अनुसंधान प्रकोष्ठ (रिसर्च सेल) के संयुक्त तत्वावधान में 10 जुलाई 2026 को संस्थान के लेक्चर थिएटर?5 में एक विशिष्ट अतिथि व्याख्यान कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस अकादमिक कार्यक्रम में संकाय सदस्यों, शोधकर्ताओं, चिकित्सकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समन्वित स्वास्थ्य सेवा (इंटीग्रेटिव हेल्थकेयर) तथा वैज्ञानिक अनुसंधान संचार के क्षेत्र में ज्ञानवर्धक संवाद को प्रोत्साहित करना था।

यह कार्यक्रम एम्स भोपाल के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) अशोक कुमार मोहापात्र के संरक्षण में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रो. (डॉ.) माधबानंद कर थे। इस अवसर पर प्रो. (डॉ.) रजनीश जोशी (डीन?अकादमिक), प्रो. (डॉ.) रेहान-उल-हक़ (डीन?अनुसंधान), श्री संदेश कुमार जैन (उप निदेशक?प्रशासन) तथा प्रो. (डॉ.) विकास गुप्ता (चिकित्सा अधीक्षक) सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

अपने उद्बोधन में कार्यपालक निदेशक प्रो. (डॉ.) माधबानंद कर ने स्वास्थ्य सेवाओं में बहुविषयक (इंटरडिसिप्लिनरी) दृष्टिकोण के महत्व पर बल देते हुए कहा कि भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए साक्ष्य-आधारित अनुसंधान तथा प्रभावी वैज्ञानिक संचार अत्यंत आवश्यक हैं।

कार्यक्रम का प्रथम व्याख्यान अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त होम्योपैथी विशेषज्ञ, चिकित्सक, शोधकर्ता एवं अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से अलंकृत प्रो. (डॉ.) ए. के. गुप्ता द्वारा प्रस्तुत किया गया। उन्होंने ?एएलएस/एमएनडी के प्रबंधन में होम्योपैथी? विषय पर व्याख्यान देते हुए एमियोट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस (ALS) एवं मोटर न्यूरॉन डिजीज (MND) के उपचार में होम्योपैथी की संभावनाओं, नैदानिक दृष्टिकोण तथा रोगियों की देखभाल एवं जीवन-गुणवत्ता में समन्वित चिकित्सा पद्धतियों की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उनके व्याख्यान ने प्रतिभागियों में विशेष रुचि उत्पन्न की तथा उभरती चिकित्सीय संभावनाओं पर सार्थक एवं विचारोत्तेजक चर्चा को प्रेरित किया।

MND/ALS तेज़ी से बढ़ने वाली एक ऐसी बीमारी है जिसका पारंपरिक चिकित्सा में कोई पक्का इलाज या समाधान नहीं है। लेकिन अपनी प्रस्तुति में, डॉ. गुप्ता ने होम्योपैथी के ज़रिए 18 साल के एक लड़के में MND के पूरी तरह ठीक होने का मामला दिखाया। इस मामले को सभी गणमान्य व्यक्तियों से ज़बरदस्त प्रतिक्रिया मिली और इसने MND/ALS से पीड़ित मरीज़ों के लिए उम्मीद का एक नया दौर शुरू किया। डॉ. ए.के. गुप्ता, संस्थापक निदेशक, AKGsOVIHAMS (ओम विद्या इंस्टीट्यूट ऑफ़ होम्योपैथी एंड एलाइड मेडिकल साइंसेज) जिन्हें चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवा में 'इंटीग्रेशन का जनक' (Father of Integration) भी कहा जाता है, ने कई लगातार बने रहने वाले लक्षणों में सबूत-आधारित सुधार भी दिखाए। इनमें सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि न केवल लगातार वज़न घटने और मांसपेशियों के कमज़ोर होने (मसल वेस्टिंग) को रोका गया, बल्कि कई मरीज़ों का वज़न बढ़ा और मांसपेशियों के और कमज़ोर होने की प्रक्रिया पर भी नियंत्रण पाया गया।

द्वितीय व्याख्यान सुप्रसिद्ध विज्ञान संचारक, शिक्षाविद्, लेखक एवं नीति सलाहकार डॉ. नकुल पराशर द्वारा ?पांडुलिपि से प्रकाशन तक: शोध-पत्र लेखन की एक व्यापक मार्गदर्शिका? विषय पर दिया गया। उच्च शिक्षा, अनुसंधान संचार तथा अकादमिक प्रकाशन के क्षेत्र में अपने व्यापक अनुभव के आधार पर उन्होंने वैज्ञानिक पांडुलिपि तैयार करने की प्रक्रिया, प्रकाशन नैतिकता, उपयुक्त जर्नल का चयन, अनुसंधान की सत्यनिष्ठा, सहकर्मी समीक्षा (पीयर रिव्यू) की प्रक्रिया तथा SCOPUS एवं Web of Science जैसे अंतरराष्ट्रीय अनुक्रमण (इंडेक्सिंग) तंत्रों की विस्तृत जानकारी प्रदान की। उनका व्याख्यान विशेष रूप से युवा शोधकर्ताओं एवं संकाय सदस्यों के लिए अत्यंत उपयोगी एवं प्रेरणादायक सिद्ध हुआ, जो अपने शोध कार्य की गुणवत्ता एवं वैश्विक दृश्यता को बढ़ाना चाहते हैं।

कार्यक्रम का समापन एक अत्यंत रोचक एवं संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने दोनों वक्ताओं से सीधे संवाद कर नैदानिक अनुसंधान तथा अकादमिक प्रकाशन से संबंधित विभिन्न विषयों पर अपने प्रश्नों के समाधान प्राप्त किए। इस चर्चा ने साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य सेवाओं, नैतिक अनुसंधान पद्धतियों तथा वैज्ञानिक ज्ञान के प्रभावी प्रसार के बढ़ते महत्व को रेखांकित किया।

कार्यक्रम के अंत में आयुष विभाग एवं अनुसंधान प्रकोष्ठ ने सभी विशिष्ट वक्ताओं, गणमान्य अतिथियों, संकाय सदस्यों, शोधकर्ताओं तथा विद्यार्थियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया, जिनकी उत्साहपूर्ण सहभागिता से यह कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस आयोजन ने अकादमिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने, बहुविषयक संवाद को सुदृढ़ करने तथा समाजहित में अनुसंधान-आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को प्रोत्साहित करने के प्रति एम्स भोपाल की प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित किया।

यदि चाहें, मैं इसे पीआईबी (Press Information Bureau) शैली की अधिक सरकारी एवं औपचारिक हिंदी में भी तैयार कर सकता हूँ, जो राष्ट्रीय समाचार एजेंसियों और सरकारी मीडिया प्रकोष्ठों द्वारा प्रचलित शैली के अनुरूप होगी।