बरसात में जर्जर सड़क से छात्र-छात्रोंओं को स्कूल जाने लिए उठाना पड़ता है कठिनाइयों का सामना।

वाल्मीकि नगर से अभिमन्यु कुमार गुप्ता की रिपोर्ट।थाना क्षेत्र के लक्ष्मीपुर रामपुरवा पंचायत का एक ऐसा गांव जो आजादी के लगभग 8 दशक के बाद भी आज मुख्य धारा से कटा हुआ है।बरसात के दिनों में यह गांव एक टापू में तब्दील हो जाता है। भारत-नेपाल सीमा के समीप बसे गांव झंडू टोला, चकदहवा, कान्ही टोला और बिन टोली के बच्चों को शिक्षा के लिए आज भी संघर्ष करना पड़ रहा है। यहां के बच्चों को स्कूल जाने के लिए तकरीबन 5 किलोमीटर का जंगल से होकर जर्जर मार्ग से वन्यजीवों के ख़तरों के बीच सफर तय करना पड़ता है। इस सफर में घने जंगल को भी पार करना होता है, जो इन बच्चों के लिए हर दिन एक चुनौती बन जाता है। खासकर बरसात के दिनों में यह समस्या और बढ़ जाती है, जब रास्ते पूरी तरह से कीचड़मय और दलदली हो जाते हैं।माया कुमारी,सरिता कुमारी,मोहन कुमार,कैलाश कुमार सहित अन्य बच्चों ने बताया कि गांव में सिर्फ पांचवीं कक्षा तक की पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध है, जिसके बाद बच्चों को वाल्मीकिनगर के भेड़िहारी स्कूल जाना पड़ता है। जहां उन्हें उच्च शिक्षा के लिए मुश्किलों के बीच जाना पड़ता है। क्षेत्र के ग्रामीणों को उम्मीद है कि सरकार उनके समस्याओं का निराकरण करेगी।