कोरबा कलेक्टर साहब का आदेश या रद्दी का टुकड़ा जनदर्शन की फाइल दबाकर बैठे तहसीलदार, आखिर कानपुर बिरयानी के रसूख के आगे क्यों कांप रही है राजस्व की कलम

CITIUPDATE NEWS(संतोष सारथी) कोरबा जिला प्रशासन में इन दिनों एक अजीबोगरीब और दोहरा कानून चल रहा है। यहाँ कायदे और कानून आरोपी का नाम और हैसियत देखकर तय हो रहे हैं। कुछ दिन पूर्व प्रशासन ने

रज्जाक अली के सीतामढ़ी स्थित अवैध निर्माण पर स्वतः संज्ञान लिया और बिना देर किए बुलडोजर चलाकर उसे जमींदोज कर दिया। लेकिन इसके ठीक उलट, जब बात कानपुर बिरयानी के संचालक अब्दुल नसीम मसूरी द्वारा आरामशीन मुख्य मार्ग पर 1925 वर्ग फीट सरकारी जमीन को निगलने और 22 लाख रुपए की अवैध डील की आती है, तो वही प्रशासन धृतराष्ट्र बन जाता है।
कलेक्टर की चौखट जनदर्शन में नामजद शिकायत के बाद भी आरामशीन मार्ग पर अवैध कमर्शियल कॉम्प्लेक्स का निर्माण युद्ध स्तर पर जारी है। सवाल उठता है कि रज्जाक अली के लिए जो कानून हंटर बना वही कानून अब्दुल नसीम मसूरी के सामने मौन क्यों है?

तहसीलदार, एसडीएम और नजूल अमला क्या सब संरक्षण के खेल में शामिल हैं


एक पर करम और एक पर सितम वाली यह कहावत इस समय कोरबा तहसील और एसडीएम कार्यालय पर पूरी तरह सटीक बैठती है। शिकायतकर्ता ने सबूतों के साथ कलेक्टर जनदर्शन में गुहार लगाई जिस पर जिले के मुखिया DM ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल तहसीलदार कोरबा को जांच और कार्रवाई के लिए निर्देशित किया।
लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी कोरबा तहसील की रहस्यमयी चुप्पी कई गंभीर संदेह पैदा कर रही है l


नियम कहते हैं कि सरकारी जमीन पर पट्टा हेराफेरी और अवैध निर्माण की शिकायत पर तुरंत काम रोको नोटिस जारी होना चाहिए।

शासकीय पोर्टल पर शिकायत का स्टेटस आज भी अपूर्ण दिख रहा है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि मौके पर अवैध निर्माण पूर्ण होने की कगार पर है।
अधिकारियों का यह सुस्ती लापरवाही नहीं बल्कि सोची-समझी रणनीति प्रतीत होती है। क्या तहसीलदार, एसडीएम और नजूल के जिम्मेदार अधिकारी जानबूझकर इस फाइल को दबाकर बैठे हैं, ताकि निर्माणकर्ता को अपना कॉम्प्लेक्स पूरा करने का पर्याप्त समय मिल सके?


बिना NOC के तन रही इमारत, नगर निगम का उड़नदस्ता बना 'अंधा-बहरा'


इस पूरे खेल में नगर पालिक निगम कोरबा की भूमिका भी पूरी तरह कटघरे में है। मुख्य मार्ग पर बिना किसी वैध मानचित्र स्वीकृति NOC के 1925 वर्ग फीट में आलीशान कमर्शियल कॉम्प्लेक्स खड़ा किया जा रहा है। दिन-रात कंक्रीट मिक्सर चल रहे हैं, ईंटें जोड़ी जा रही हैं, लेकिन निगम का उड़नदस्ता इस मार्ग से गुजरते वक्त अपनी आंखें मूंद लेता है। क्या नगर निगम के अधिकारियों को इसमें कोई अवैधता नजर नहीं आती या फिर रसूखदारों के आगे कार्रवाई करने की उनकी हिम्मत जवाब दे जाती है?

सुशासन को खुली चुनौती

वर्ष 2002-03 में रकबीर पिता महेंद्र सिंह द्वारा 240 वर्ग फीट का जो अस्थायी पट्टा कथित तौर पर फर्जी तरीके से लिया गया था उसे 24 साल बाद अब्दुल नसीम मसूरी को 22 लाख रुपए में बेच दिया गया। अवैध पट्टे पर अवैध तरीके से स्वीकृत आकार से कई गुना ज्यादा जमीन कब्जा कर प्रशासनिक व्यवस्था को सरेआम ठेंगा दिखाया जा रहा है।


जिम्मेदार जो कटघरे में हैं: जवाब तो देना होगा

1. तहसीलदार व राजस्व अमला कोरबा

कलेक्टर के स्पष्ट निर्देश के बाद भी मौके पर जाकर काम क्यों नहीं रुकवाया गया? क्या अपूर्ण स्टेटस के पीछे कोई अंदरूनी डील है?


2. अनुविभागीय अधिकारी SDM अनुभाग के भीतर इतने बड़े पैमाने पर हो रहे सरकारी जमीन के घोटाले और दोहरी दंडात्मक नीति पर आपकी निगरानी क्यों फेल साबित हुई?


3. नगर पालिक निगम प्रशासन

बिना अनुज्ञा के मुख्य मार्ग पर निर्माण करने की छूट कानपुर बिरयानी के संचालक को किस नियम के तहत दी गई?


4. नजूल विभाग सरकारी जमीन की सरेआम 22 लाख में हुई इस अवैध खरीद-बिक्री पर नजूल मौन धारण करके क्यों बैठा है?


विराम चिन्ह या व्यवस्था का दुर्भाग्य


अगर समय रहते रज्जाक अली की तरह इस मामले पर भी त्वरित और निष्पक्ष बुलडोजर कार्रवाई नहीं हुई तो आम जनता का इस प्रशासनिक सिस्टम से भरोसा पूरी तरह उठ जाएगा। यह सीधे तौर पर कोरबा जिला प्रशासन की साख और सुशासन के दावों की परीक्षा है।
अब देखना यह होगा कि क्या कोरबा कलेक्टर अपने मातहत अधिकारियों की इस कछुआ चाल और भेदभावपूर्ण रवैये पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए तत्काल निर्माण को ध्वस्त करने का आदेश देते हैं, या फिर यह रसूखदार सिंडिकेट कलेक्टोरेट के आदेशों को अपने पैरों तले रौंदता रहेगा?