उत्तर पश्चिम रेलवे के अधिकारियों और कर्मचारियों ने हिमालय की दुर्गम चोटियों पर रचा साहस का नया इतिहास

उत्तर पश्चिम रेलवे के अधिकारियों और कर्मचारियों ने हिमालय की दुर्गम चोटियों पर रचा साहस का नया इतिहास

जयपुर। उत्तर पश्चिम रेलवे के अधिकारियों और कर्मचारियों ने साहस, धैर्य और टीम भावना का शानदार परिचय देते हुए हिमालय की दुर्गम पहाड़ियों पर एक नया इतिहास रच दिया। उत्तर रेलवे ट्रैकिंग एवं पर्वतारोहण संघ द्वारा आयोजित विशेष ट्रैकिंग अभियान में उत्तर पश्चिम रेलवे के छह सदस्यीय दल ने समुद्र तल से लगभग 14 हजार 100 फीट की ऊंचाई पर स्थित प्रसिद्ध हम्पता दर्रा की कठिन ट्रैकिंग सफलतापूर्वक पूरी की।

हिमाचल प्रदेश की गोद में स्थित हम्पता दर्रा प्राकृतिक सुंदरता और चुनौतीपूर्ण मार्गों के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। यह दर्रा हरे-भरे कुल्लू क्षेत्र को शुष्क और रहस्यमयी लाहौल घाटी से जोड़ता है। ऊँचे बर्फ से ढके पर्वत, संकरे पहाड़ी रास्ते, गहरी घाटियाँ और बहती हिमनदीय धाराएँ इसे देश के सबसे रोमांचक ट्रैकिंग मार्गों में शामिल करती हैं।

इस साहसिक अभियान में उत्तर पश्चिम रेलवे की ओर से सहायक उप महाप्रबंधक सुरेन्द्र सर्राफ के नेतृत्व में छह सदस्यीय दल ने भाग लिया। दल में सहायक कार्मिक अधिकारी भंवर सिंह मीना,हरीश मीना,जगदीश धुंधाड़ा,वरुण सांखला और श्री रामावतार मीना शामिल रहे।

अभियान के दौरान तेज ठंडी हवाएं, ऊंचाई पर ऑक्सीजन की कमी, फिसलन भरे पत्थर, बर्फ से ढके रास्ते, लगातार कठिन चढ़ाई और खतरनाक उतराई जैसी अनेक चुनौतियां सामने आईं। इसके बावजूद दल के सभी सदस्यों ने अदम्य साहस, आत्मविश्वास और आपसी सहयोग का परिचय देते हुए इस कठिन ट्रैकिंग अभियान को सफलतापूर्वक पूरा किया।

यह ट्रैकिंग केवल शारीरिक क्षमता की परीक्षा नहीं थी, बल्कि मानसिक मजबूती, नेतृत्व क्षमता, टीम समन्वय और विपरीत परिस्थितियों में सही निर्णय लेने की क्षमता का भी बेहतरीन उदाहरण बनी। उत्तर पश्चिम रेलवे के अधिकारियों और कर्मचारियों ने इस अभियान के माध्यम से साबित किया कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और टीम में विश्वास व सहयोग की भावना हो, तो हिमालय जैसी कठिन चुनौतियां भी सफलता की राह नहीं रोक सकतीं।

हम्पता दर्रा की यह साहसिक यात्रा प्रकृति संरक्षण, पर्यावरण के प्रति जागरूकता और साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने का प्रेरक संदेश भी देती है। कठिन परिस्थितियों में सुरक्षित और जिम्मेदारी के साथ ट्रैकिंग करते हुए दल ने पर्वतीय पर्यावरण संरक्षण का भी उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया।

उत्तर पश्चिम रेलवे के इस साहसिक अभियान ने यह साबित कर दिया कि भारतीय रेल के कर्मचारी केवल सेवा में ही नहीं, बल्कि साहस और रोमांच के क्षेत्र में भी नई ऊंचाइयों को छूने का जज्बा रखते हैं।