सिकल सेल रोग की समय पर जांच से बच सकती हैं गंभीर जटिलताएं


शुरुआती पहचान और उपचार से मरीज जी सकते हैं बेहतर जीवन-विशेषज्ञ

फोटो नं0 105 पीडियाट्रिक हीमैटो-ऑन्कोलॉजी एवं बोन मैरो ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ डॉ. चंद्रिका वमा

अलीगढ़। सिकल सेल रोग एक गंभीर आनुवंशिक रक्त विकार है, जो जन्म से ही व्यक्ति को प्रभावित करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि बीमारी के प्रति जागरूकता और समय पर जांच के अभाव में कई मरीज गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करते हैं, जबकि शुरुआती पहचान और उचित उपचार से इसके दुष्प्रभावों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नोएडा की कंसल्टेंट पीडियाट्रिक हीमैटो-ऑन्कोलॉजी एवं बोन मैरो ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ डॉ. चंद्रिका वर्मा ने बताया कि सिकल सेल रोग में लाल रक्त कोशिकाएं अपने सामान्य गोल आकार के बजाय हंसिया या अर्धचंद्राकार रूप ले लेती हैं। ये असामान्य कोशिकाएं रक्त वाहिकाओं में रुकावट पैदा करती हैं, जिससे शरीर के विभिन्न अंगों तक रक्त और ऑक्सीजन की आपूर्ति प्रभावित हो जाती है। इसके कारण मरीज को तीव्र दर्द, बार-बार संक्रमण, एनीमिया तथा अन्य गंभीर जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है।उन्होंने बताया कि नवजात शिशुओं में प्रारंभिक जांच इस बीमारी की पहचान का सबसे प्रभावी माध्यम है। यदि जन्म के बाद शुरुआती अवस्था में रोग का पता चल जाए तो समय पर उपचार, टीकाकरण और नियमित निगरानी के माध्यम से गंभीर संक्रमण, स्ट्रोक, बार-बार दर्द के दौरे और अंगों को होने वाले नुकसान के खतरे को कम किया जा सकता है।डॉ. वर्मा ने परिवार नियोजन से पहले जेनेटिक काउंसलिंग और स्क्रीनिंग को भी आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि यदि माता-पिता दोनों सिकल सेल जीन के वाहक हैं तो बच्चे में यह रोग होने की संभावना 25 प्रतिशत तक हो सकती है। ऐसे में समय रहते जांच और परामर्श भविष्य के लिए सही निर्णय लेने में मददगार साबित होता है।विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक थकान, कमजोरी, बार-बार संक्रमण, हाथ-पैरों में सूजन, तीव्र दर्द के दौरे, बच्चों के विकास में देरी, सीने में दर्द, बुखार, सांस लेने में कठिनाई तथा दृष्टि संबंधी समस्याएं सिकल सेल रोग के प्रमुख लक्षण हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक है।डॉ. चंद्रिका वर्मा ने कहा कि सिकल सेल रोग से पीड़ित मरीजों के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित आहार, समय पर टीकाकरण और चिकित्सकीय परामर्श का पालन बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने लोगों से इस बीमारी के प्रति जागरूक रहने और समय पर जांच कराने की अपील करते हुए कहा कि शुरुआती पहचान ही बेहतर उपचार और स्वस्थ जीवन की कुंजी है।