बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि पर जिला कांग्रेस विधि विभाग ने गोष्ठी आयोजित कर दी श्रद्धांजलि

कासगंज। मंगलवार को जिला कांग्रेस कमेटी विधि विभाग के चेयरमैन एवं अधिवक्ता सत्येन्द्र पाल सिंह बैस ने अपने कार्यालय पर अधिवक्ता साथियों के साथ महान आदिवासी, स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक एवं महान लोकनायक बिरसा मुंडा जी की पुण्यतिथि पर गोष्ठी का आयोजन किया। इस दौरान उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए चित्र पर माल्यार्पण व पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई।

चेयरमैन सत्येन्द्र पाल सिंह बैस अधिवक्ता ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा (15 नवंबर 1875 ? 9 जून 1900) एक महान आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक और लोकनायक थे। उन्होंने 19वीं सदी के अंत में ब्रिटिश शासन और ईसाई मिशनरियों के अत्याचारों के खिलाफ उलगुलान (विद्रोह) का नेतृत्व किया। झारखंड के उलिहातू गांव में जन्मे बिरसा ने आदिवासियों को संगठित कर जल, जंगल और जमीन के अधिकारों की रक्षा की।

बैस ने आगे बताया कि बिरसा मुंडा ने 'बिरसा धर्म' की स्थापना की तथा आदिवासियों को अंधविश्वास छोड़ने, शराब से दूर रहने, चोरी न करने और अपने धर्म में वापस लौटने का संदेश दिया। लोगों ने उनके समाज सुधारों और साहस को देखते हुए उन्हें भगवान का दर्जा दिया। उन्हें 'धरती आबा' (धरती के पिता) के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने 1894 में अंग्रेजों की दमनकारी लगान व्यवस्था के खिलाफ आंदोलन शुरू किया और लगान माफी के लिए सभी मुंडाओं को एकजुट किया। बाहरी लोगों और अंग्रेजों को भगाकर मुंडा राज्य स्थापित करने का आह्वान किया। अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह भड़कने पर उन्हें कई बार गिरफ्तार किया गया। अंततः 3 फरवरी 1900 को चक्रधरपुर के जामकोपाई जंगल से गिरफ्तार कर लिया गया। कैद के दौरान रहस्यमय परिस्थितियों में 9 जून 1900 को रांची जेल में उनकी मृत्यु हो गई। बिरसा मुंडा की प्रारंभिक शिक्षा चाईबासा के जर्मन मिशन स्कूल में हुई। बाद में उन्होंने ब्रिटिश ईसाई मिशनरियों द्वारा किए जा रहे आदिवासियों के धर्मांतरण का कड़ा विरोध किया और अपने समुदाय के सांस्कृतिक उत्थान पर जोर दिया। जब तक सृष्टि रहेगी, तब तक बिरसा मुंडा का नाम इतिहास में अमर रहेगा।

इस अवसर पर पुण्यतिथि मनाने वालों में शिवकुमार सिंह, पंकज चतुर्वेदी, यशवीर सिंह यादव, अयोध्या प्रसाद, जितिन मौर्य, होडिल सिंह वर्मा, संदीप यादव, निर्मल वर्मा, विवेक राघव, राज, तेजेंद्र, मुन्नालाल, यासीन, पुष्पेंद्र, मोहम्मद खालिद अली, धारा सिंह आदि अधिवक्ता मौजूद रहे।