मंगरौर ग्राम पंचायत में ब्लॉक प्रमुख के द्वारा मनरेगा कार्यों को लेकर उठे सवाल, ग्रामीणों ने जांच की मांग की मंगरौर में कागजों पर चल रहे सैकड़ों मजदूर से अधिक और जमीनी हकीकत में अंतर, प्रशासन

मंगरौर ग्राम पंचायत में ब्लॉक प्रमुख के द्वारा मनरेगा कार्यों को लेकर उठे सवाल, ग्रामीणों ने जांच की मांग की

मंगरौर में कागजों पर चल रहे सैकड़ों मजदूर से अधिक और जमीनी हकीकत में अंतर, प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग

शहाबगंज (चंदौली)। शहाबगंज विकास खंड की ग्राम पंचायत मंगरौर में मनरेगा के अंतर्गत कराए जा रहे कार्यों को लेकर ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने गंभीर सवाल उठाए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मनरेगा कार्यों में दर्ज श्रमिकों की संख्या और मौके पर कार्यरत मजदूरों की संख्या में अंतर दिखाई दे रहा है, जिसकी निष्पक्ष जांच कराए जाने की आवश्यकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि कई कार्यस्थलों पर अभिलेखों में बड़ी संख्या में श्रमिकों के कार्य करने का उल्लेख मिलता है, जबकि मौके पर अपेक्षाकृत कम मजदूर दिखाई देते हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

मस्टर रोल और श्रमिक उपस्थिति की जांच की मांग

स्थानीय लोगों का कहना है कि मनरेगा के तहत संचालित कार्यों में मस्टर रोल, उपस्थिति रजिस्टर और वास्तविक श्रमिकों की संख्या का मिलान कराया जाना चाहिए। उनका मानना है कि इससे वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
कुछ ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि उपस्थिति और कार्य विवरण से जुड़े अभिलेखों की गहन जांच आवश्यक है। हालांकि इन दावों की पुष्टि किसी आधिकारिक जांच में अभी तक नहीं हुई है।

तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रिया पर भी उठे सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि मनरेगा के अंतर्गत स्वीकृत कार्यों की तकनीकी जांच भी कराई जानी चाहिए। उनका मानना है कि यदि सभी कार्य नियमों के अनुरूप हुए हैं तो जांच से स्थिति स्पष्ट होगी और जनता का विश्वास मजबूत होगा।
मनरेगा से जुड़े कार्यों में तकनीकी स्वीकृति, माप पुस्तिका, भुगतान प्रक्रिया और कार्य गुणवत्ता जैसे बिंदुओं की भी जांच की मांग की जा रही है।

ब्लॉक स्तर पर पारदर्शिता बढ़ाने की मांग

सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि ग्रामीण विकास योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने मांग की कि मनरेगा के अंतर्गत हुए कार्यों का सोशल ऑडिट कराया जाए और उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।

मनरेगा योजना का उद्देश्य

मनरेगा का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराना तथा गांवों में स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण करना है। योजना के अंतर्गत तालाब, सड़क, नाली, जल संरक्षण और भूमि विकास जैसे कार्य कराए जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि योजना की सफलता के लिए नियमित निरीक्षण और सामाजिक अंकेक्षण आवश्यक है।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
मंगरौर ग्राम पंचायत के मनरेगा कार्यों की स्वतंत्र जांच।
मस्टर रोल और वास्तविक श्रमिक उपस्थिति का सत्यापन।
भुगतान अभिलेखों की जांच।
तकनीकी स्वीकृतियों और कार्य गुणवत्ता का मूल्यांकन।
सोशल ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
अनियमितता मिलने पर जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।

जांच रिपोर्ट का इंतजार

क्षेत्र में उठ रहे सवालों के बीच अब लोगों की निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि निष्पक्ष जांच से वास्तविक स्थिति सामने आएगी और यदि कहीं अनियमितता है तो उस पर प्रभावी कार्रवाई होनी चाहिए।

मंगरौर ग्राम पंचायत में मनरेगा कार्यों को लेकर उठे सवाल ग्रामीण विकास योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता को एक बार फिर सामने लाते हैं। अब यह देखना होगा कि संबंधित विभाग शिकायतों को किस गंभीरता से लेते हैं और जांच के माध्यम से वास्तविक स्थिति को जनता के सामने लाने के लिए क्या कदम उठाते हैं।