परमिशन के नाम पर शहाबगंज में अवैध खनन का खेल! बिना परमिट और बिना फिटनेस दौड़ रहे वाहन शहाबगंज क्षेत्र बना मिट्टी खनन माफियाओं का गढ़

परमिशन के नाम पर शहाबगंज में अवैध खनन का खेल! बिना परमिट और बिना फिटनेस दौड़ रहे वाहन


शहाबगंज क्षेत्र बना मिट्टी खनन माफियाओं का गढ़


शहाबगंज/चंदौली। जनपद चंदौली के शहाबगंज थाना क्षेत्र में अवैध मिट्टी खनन और ओवरलोड वाहनों का कारोबार लगातार बढ़ता जा रहा है। क्षेत्रीय लोगों का आरोप है कि प्रशासनिक सख्ती के दावों के बावजूद खनन माफिया बेखौफ होकर रात-दिन अवैध खनन और मिट्टी परिवहन कर रहे हैं।


ग्रामीणों के अनुसार क्षेत्र में बिना कमर्शियल रजिस्ट्रेशन, बिना परमिट, बिना फिटनेस और बिना वैध लाइसेंस के वाहन धड़ल्ले से मिट्टी ढो रहे हैं। इसके बावजूद इन वाहनों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही, जिससे जिम्मेदार विभागों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।


?परमिशन? के नाम पर चल रहा खेल


स्थानीय लोगों का आरोप है कि ?परमिशन? के नाम पर अवैध खनन को संरक्षण दिया जा रहा है। रात होते ही जेसीबी मशीनों से मिट्टी की खुदाई शुरू हो जाती है और ओवरलोड ट्रैक्टर-ट्रालियां तथा अन्य वाहन मुख्य सड़कों पर फर्राटा भरते नजर आते हैं।


ग्रामीणों का कहना है कि इन वाहनों से न सिर्फ सड़कों को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि हादसों का खतरा भी लगातार बना रहता है। कई बार शिकायत के बावजूद कार्रवाई न होना लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।


बिचौलियों के जरिए चलता है ?सिस्टम? ?


सूत्रों के हवाले से क्षेत्र में चर्चा है कि अवैध खनन के पीछे एक संगठित नेटवर्क सक्रिय है। आरोप है कि बिचौलियों के माध्यम से पूरे ?सिस्टम? को संचालित किया जाता है। यही वजह है कि कार्रवाई के बजाय खनन माफियाओं पर मेहरबानी दिखाई देती है।


हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन लगातार सामने आ रही शिकायतें पुलिस और प्रशासनिक तंत्र की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर रही हैं।
एक स्थानीय निवासी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया, ?रोज रात में दर्जनों वाहन मिट्टी लेकर निकलते हैं। बिना सेटिंग के इतना बड़ा काम संभव नहीं है। शिकायत के बाद भी कोई फर्क नहीं पड़ता।?


खनन और आरटीओ विभाग की भूमिका पर सवाल


क्षेत्रीय लोगों का आरोप है कि खनन विभाग और आरटीओ विभाग भी कार्रवाई के बजाय मूकदर्शक बने हुए हैं। बिना फिटनेस और बिना परमिट चल रहे वाहनों के खिलाफ जांच अभियान तक नहीं चलाया जा रहा।


ग्रामीणों का कहना है कि यदि नियमित जांच हो तो बड़ी संख्या में अवैध वाहन पकड़े जा सकते हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी केवल कार्यालयों तक सीमित हैं। इससे खनन माफियाओं के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं।


सड़क सुरक्षा और पर्यावरण पर खतरा


विशेषज्ञों के अनुसार अवैध खनन से जहां पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है, वहीं ओवरलोड वाहनों से सड़कें क्षतिग्रस्त हो रही हैं। तेज रफ्तार और बिना मानक वाले वाहन कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं।


जांच और कार्रवाई की मांग


क्षेत्रीय नागरिकों ने जिला प्रशासन, पुलिस अधीक्षक और शासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही अवैध खनन में शामिल लोगों, अवैध वाहनों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।


लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो शहाबगंज क्षेत्र में अवैध खनन का यह कारोबार और अधिक बढ़ेगा तथा सरकार की ?जीरो टॉलरेंस? नीति केवल कागजों तक सीमित रह जाएगी।