महिला स्वाभिमान बटालियन में विश्व पर्यावरण दिवस पर पर्यावरण जागरूकता कार्यशाला एवं पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित।

वाल्मीकि नगर से अभिमन्यु कुमार गुप्ता की रिपोर्ट।

प्रगाश इकोलॉजिकल ग्रीनवे फाउंडेशन द्वारा स्वाभिमान बटालियन परिसर में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर शुक्रवार को पर्यावरण संरक्षण, जन-जागरूकता एवं पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महिला स्वाभिमान बटालियन के कमांडेंट निर्मला कुमारी के नेतृत्व में बटालियन के जवानों, महिला जवानों, संत जेवियर्स विद्यालय के बच्चों तथा फाउंडेशन के स्वयंसेवकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।कार्यक्रम में फाउंडेशन के संस्थापक मनोज कुमार, अजय झा, प्रगास की युवा स्वयंसेविका अधिश्री झा, मनीष कुमार, अनु कुमार, प्रधानाध्यापक अंकित कुमार, आकाश कुमार, राहुल कुमार सहित अन्य स्वयंसेवक उपस्थित रहे।कार्यक्रम का शुभारंभ भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 के ज्ञात एवं अज्ञात वीर सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित कर किया गया। उपस्थित सभी लोगों ने वीरों के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया तथा राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम को आगे बढ़ाया।इसके पश्चात आयोजित पर्यावरण कार्यशाला में मनोज कुमार द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस के महत्व, जलवायु परिवर्तन, बढ़ते प्रदूषण, जैव विविधता संरक्षण, जल संकट एवं वृक्षों की घटती संख्या जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। कमांडेंट सुश्री कुमारी ने उपस्थित जवानों एवं बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक अभियान नहीं बल्कि जीवनशैली का हिस्सा होना चाहिए। उन्होंने सिंगल-यूज प्लास्टिक का बहिष्कार करने, कपड़े के झोले का उपयोग बढ़ाने, जल एवं ऊर्जा की बचत करने, स्वच्छता अपनाने तथा अधिक से अधिक पौधे लगाने के लिए प्रेरित किया।
विदित हो कि स्वयंसेवियों ने मनोज के पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में अपने लंबे अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे वर्ष 2007 से निरंतर पौधारोपण एवं पर्यावरण जागरूकता अभियानों से जुड़े हुए हैं। पिछले लगभग दो दशकों में उनके नेतृत्व में हजारों पौधे लगाए गए हैं, जिनमें से बड़ी संख्या आज विशाल वृक्षों के रूप में विकसित होकर पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। वाल्मीकि नगर एवं आसपास के क्षेत्रों में दिखाई देने वाले अनेक चंपा एवं रुद्राक्ष के वृक्ष उनके अथक प्रयासों और वर्षों की पर्यावरणीय साधना का परिणाम हैं।उन्होंने कहा कि वृक्ष केवल पर्यावरण को संतुलित नहीं रखते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ वायु, शुद्ध जल और सुरक्षित भविष्य का आधार भी तैयार करते हैं। उन्होंने बच्चों से प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने तथा प्रत्येक वर्ष कम-से-कम एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल करने का आह्वान किया।कार्यशाला के दौरान पर्यावरण संरक्षण के व्यावहारिक उपायों पर भी चर्चा हुई। प्रतिभागियों को बताया गया कि घरों एवं विद्यालयों में ऊर्जा की बचत, वर्षा जल संचयन, कचरे का पृथक्करण, पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग), प्लास्टिक के उपयोग में कमी तथा स्थानीय जैव विविधता के संरक्षण जैसे छोटे-छोटे कदम बड़े सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।