उत्तर मध्य रेलवे में हिंदी प्रतियोगिताओं का आयोजन, कर्मचारियों ने दिखाई रचनात्मक प्रतिभा

प्रयागराज। राजभाषा हिंदी के प्रयोग-प्रसार को बढ़ावा देने तथा अधिकारियों एवं कर्मचारियों की रचनात्मक सहभागिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उत्तर मध्य रेलवे मुख्यालय के राजभाषा विभाग द्वारा क्षेत्रीय रेल स्तर पर हिंदी टिप्पण एवं प्रारूप लेखन, हिंदी निबंध तथा हिंदी वाक् प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। यह आयोजन महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह के निर्देश एवं मुख्य राजभाषा अधिकारी विनीत कुमार श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।

प्रतियोगिताओं में महाप्रबंधक कार्यालय सहित सभी मंडलों और कारखानों के कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। हिंदी वाक् प्रतियोगिता का विषय "परीक्षाओं में अंकों का बढ़ता प्रतिशत ? कितना लाभदायक, कितना हानिकारक" रखा गया, जिस पर प्रतिभागियों ने शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं, सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक प्रभावों तथा वैश्विक परिप्रेक्ष्य पर अपने विचार प्रस्तुत किए। वक्ताओं ने बदलते समय के अनुरूप शिक्षा और मूल्यांकन प्रणाली को अधिक मूल्यपरक एवं व्यावहारिक बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम में निर्णायक के रूप में उपस्थित उप वित्त सलाहकार एवं मुख्य लेखाधिकारी (सामान्य) तथा उप मुख्य राजभाषा अधिकारी डॉ. गरिमा त्रिपाठी ने कहा कि वाक् प्रतियोगिताएं विषयों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ तार्किक चिंतन और विश्लेषण क्षमता को भी विकसित करती हैं। वहीं दूसरे निर्णायक उप मुख्य कार्मिक अधिकारी (औद्योगिक संबंध) डॉ. आशीष सचान ने नई शिक्षा नीति की सराहना करते हुए कहा कि इससे शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा मिलेगी तथा चरित्र निर्माण और आत्मिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।

प्रतियोगिता में रजनीश यादव ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। द्वितीय स्थान खुशबू मिश्रा तथा तृतीय स्थान दीपक शर्मा को मिला। इसके अतिरिक्त कमल नयन कुमार पाण्डेय, पवन कुमार पाण्डेय एवं राजीव सिंह को प्रेरणा पुरस्कार के लिए चयनित किया गया।

उल्लेखनीय है कि वाक् प्रतियोगिता से पूर्व "वर्तमान वैश्विक अशांति के प्रमुख कारण और नैदानिक उपाय" विषय पर हिंदी निबंध प्रतियोगिता तथा हिंदी टिप्पण एवं प्रारूप लेखन प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया। इन आयोजनों का उद्देश्य कर्मचारियों में हिंदी भाषा के प्रति रुचि बढ़ाने के साथ-साथ राजभाषा के प्रभावी प्रयोग को प्रोत्साहित करना है।