115वें वर्ष में पहुंची पंजाब मेल, विरासत और आधुनिकता का अनोखा संगम

मुंबई। भारतीय रेल की सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित ट्रेनों में शामिल पंजाब मेल ने 1 जून 2026 को अपनी गौरवशाली सेवा के 114 वर्ष पूरे कर 115वें वर्ष में प्रवेश कर लिया। इस अवसर पर ट्रेन संख्या 12137 मुंबई?फिरोजपुर पंजाब मेल के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) से प्रस्थान के दौरान विशेष उत्सव मनाया गया।

मध्य रेल ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि को यादगार बनाने के लिए पंजाब मेल के कोचों का व्यापक आधुनिकीकरण और सौंदर्यीकरण किया है। फर्स्ट एसी?सेकंड एसी कोच तथा पैंट्री कार पर हेरिटेज थीम आधारित विशेष विनाइल रैपिंग की गई है। कोचों के अंदर पंजाब मेल की 1912 की विरासत, महाराष्ट्र?पंजाब के सांस्कृतिक संबंधों और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी झलकियों को दर्शाने वाले आकर्षक कैनवास प्रिंट लगाए गए हैं। इनमें CSMT, गेटवे ऑफ इंडिया और स्वर्ण मंदिर जैसे ऐतिहासिक स्थलों के चित्र भी शामिल हैं।

यात्रियों की सुविधा और स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए ऑटो एयर फ्रेशनर, सीट कवर डिस्पेंसर, आधुनिक साबुन डिस्पेंसर, उन्नत बिब कॉक्स, पीवीसी फ्लोरिंग मरम्मत तथा स्क्रैपर मैट्स जैसी सुविधाएं जोड़ी गई हैं। वहीं गैंगवे, डोरवे और शौचालय क्षेत्रों में विशेष विनाइल रैपिंग कर रखरखाव और मजबूती बढ़ाई गई है।

इससे पहले 27 मार्च 2026 को CSMT पर आयोजित ट्रेन महोत्सव में पंजाब मेल की ऐतिहासिक यात्रा पर आधारित एक भव्य समारोह आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में रेलवे अधिकारियों, यात्रियों, रेल प्रेमियों और आम नागरिकों ने भाग लिया। इस दौरान प्रदर्शित ऑडियो-विजुअल प्रस्तुति ने पंजाब मेल के इतिहास और भारतीय रेल में उसके योगदान को जीवंत रूप से सामने रखा।

1912 में शुरू हुई थी ऐतिहासिक यात्रा

पंजाब मेल, जिसे प्रारंभ में पंजाब लिमिटेड के नाम से जाना जाता था, ने 1 जून 1912 को बॉम्बे के बैलार्ड पियर मोल स्टेशन से अपनी पहली यात्रा शुरू की थी। उस समय यह ट्रेन लगभग 2,496 किलोमीटर की दूरी तय कर पेशावर तक जाती थी। बाद में 1914 से इसका संचालन बॉम्बे वीटी (वर्तमान CSMT) से दैनिक आधार पर शुरू हुआ।

आज पंजाब मेल मुंबई और फिरोजपुर कैंटोनमेंट के बीच 1,928 किलोमीटर की दूरी 33 घंटे 35 मिनट में तय करती है तथा मार्ग में 52 स्टेशनों पर ठहरती है।

समय के साथ बदलता रहा स्वरूप

शुरुआत में मात्र छह कोचों वाली इस ट्रेन में तीन यात्री और तीन डाक व मालवाहक कोच होते थे। 1945 में इसमें वातानुकूलित कोच जोड़े गए, जबकि 2020 से यह आधुनिक एलएचबी कोचों के साथ संचालित हो रही है। वर्तमान में पूरी तरह विद्युत चालित पंजाब मेल में एसी प्रथम श्रेणी, एसी द्वितीय और तृतीय श्रेणी, स्लीपर, सामान्य श्रेणी, पैंट्री कार तथा अन्य आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं।

250 प्रतिशत से अधिक अधिभोग के साथ संचालित हो रही पंजाब मेल आज भी भारतीय रेल की विरासत, विश्वसनीयता और यात्रियों के विश्वास की प्रतीक बनी हुई है।

मध्य रेल के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी डॉ. स्वप्नील निला ने बताया कि पंजाब मेल भारतीय रेल के गौरवशाली इतिहास की जीवंत धरोहर है और इसके संरक्षण व उन्नयन के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।