हीट वेव में बच्चों की सुरक्षा ही सबसे बड़ी प्राथमिकता : डॉ. अवनीत सोनकर “बचाव ही बेहतर स्वास्थ्य की कुंजी है” भीषण गर्मी और हीट वेव को लेकर स्वास्थ्य विभाग की बढ़ी चिंता

हीट वेव में बच्चों की सुरक्षा ही सबसे बड़ी प्राथमिकता : डॉ. अवनीत सोनकर
?बचाव ही बेहतर स्वास्थ्य की कुंजी है?
भीषण गर्मी और हीट वेव को लेकर स्वास्थ्य विभाग की बढ़ी चिंता


जौनपुर। जनपद सहित पूरे पूर्वांचल में लगातार बढ़ते तापमान और उमस भरी गर्मी ने लोगों का जनजीवन प्रभावित कर दिया है। दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा पसरा दिखाई दे रहा है। मौसम विभाग द्वारा लगातार हीट वेव की चेतावनी जारी किए जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग भी पूरी तरह सतर्क हो गया है। खासकर छोटे बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को लेकर विशेष चिंता जताई जा रही है। इसी क्रम में चिकित्साधिकारी डॉ. अवनीत सोनकर ने लोगों से सावधानी बरतने की अपील करते हुए कहा कि वर्तमान समय में बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।


उन्होंने कहा कि तेज धूप और बढ़ते तापमान का सबसे ज्यादा असर बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ता है। बच्चों का शरीर गर्मी को वयस्कों की तुलना में कम सहन कर पाता है, जिसके कारण उनमें डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक, उल्टी-दस्त, चक्कर आना और तेज बुखार जैसी समस्याएं तेजी से देखने को मिल रही हैं। ऐसे में अभिभावकों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत है।


हीट वेव क्या है और क्यों है खतरनाक


डॉ. अवनीत सोनकर ने बताया कि जब लगातार कई दिनों तक तापमान सामान्य से काफी अधिक बना रहता है और गर्म हवाएं चलती हैं, तो उसे हीट वेव कहा जाता है। यह स्थिति शरीर के तापमान नियंत्रण तंत्र को प्रभावित कर देती है। यदि समय रहते सावधानी न बरती जाए तो यह जानलेवा भी साबित हो सकती है।
उन्होंने कहा कि छोटे बच्चों और बुजुर्गों में शरीर का तापमान तेजी से बढ़ता है। शरीर में पानी और जरूरी लवणों की कमी होने लगती है, जिससे कई बार व्यक्ति बेहोश तक हो सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी के कारण लोग हीट वेव को सामान्य गर्मी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जो बाद में गंभीर समस्या बन जाती है।


बच्चों पर सबसे ज्यादा असर


चिकित्साधिकारी ने बताया कि स्कूल जाने वाले बच्चों और छोटे बच्चों पर गर्मी का असर सबसे ज्यादा पड़ता है। बच्चे अक्सर खेलते समय पानी पीना भूल जाते हैं और तेज धूप में अधिक समय तक रहने से उनका शरीर जल्दी डिहाइड्रेट हो जाता है।


उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर गर्मी से संबंधित बीमारियों के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कई बच्चों में कमजोरी, सिर दर्द, चक्कर आना, उल्टी और बुखार की शिकायतें देखने को मिल रही हैं।


डॉ. सोनकर ने कहा कि अभिभावकों को बच्चों के खानपान और दिनचर्या पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। यदि थोड़ी सी भी लापरवाही हुई तो बच्चों की तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ सकती है।


दोपहर में बच्चों को घर से बाहर न निकलने दें


डॉ. अवनीत सोनकर ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक बच्चों को अनावश्यक रूप से बाहर न भेजें। इस दौरान सूर्य की किरणें और गर्म हवाएं सबसे ज्यादा खतरनाक होती हैं।
उन्होंने कहा कि यदि किसी जरूरी कार्य से बाहर जाना पड़े तो बच्चों को सिर ढककर रखें और साथ में पानी की बोतल जरूर दें। बच्चों को लगातार पानी पीने के लिए प्रेरित करें, भले ही उन्हें प्यास न लग रही हो।
उन्होंने बताया कि कई बार बच्चे खेल में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि पानी नहीं पीते, जिससे शरीर में पानी की कमी तेजी से होने लगती है।


हीट स्ट्रोक के लक्षणों को पहचानना जरूरी


चिकित्साधिकारी ने बताया कि हीट स्ट्रोक के लक्षणों को समय रहते पहचान लेना बेहद जरूरी है। यदि किसी बच्चे में निम्न लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए?
तेज बुखार
शरीर अत्यधिक गर्म होना
चक्कर आना
उल्टी होना
सिर दर्द
अत्यधिक कमजोरी
बेहोशी
सांस लेने में परेशानी
शरीर में ऐंठन


उन्होंने कहा कि कई लोग इन लक्षणों को सामान्य कमजोरी समझकर अनदेखा कर देते हैं, जिससे मरीज की स्थिति गंभीर हो जाती है।


पानी और तरल पदार्थों का सेवन बढ़ाएं


डॉ. सोनकर ने कहा कि गर्मी के मौसम में शरीर को सबसे ज्यादा जरूरत पानी की होती है। बच्चों को पर्याप्त मात्रा में पानी, नींबू पानी, छाछ, लस्सी, नारियल पानी और ओआरएस घोल का सेवन कराना चाहिए।
उन्होंने बताया कि शरीर में पानी की कमी होने पर कमजोरी और चक्कर आने लगते हैं। ऐसे में तरल पदार्थ शरीर को ठंडक पहुंचाने के साथ-साथ ऊर्जा भी प्रदान करते हैं।
उन्होंने अभिभावकों से कहा कि बच्चे बाहर से आने के तुरंत बाद ठंडा पानी या कोल्ड ड्रिंक न पिएं। इससे गले और पेट संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं।


खानपान पर विशेष ध्यान देने की जरूरत


डॉ. अवनीत सोनकर ने कहा कि गर्मी के मौसम में हल्का और पौष्टिक भोजन करना चाहिए। बच्चों को ताजे फल, हरी सब्जियां, दही और घर का बना भोजन देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बाजार में मिलने वाले खुले खाद्य पदार्थ और बासी भोजन से बचना चाहिए, क्योंकि गर्मी में जल्दी संक्रमण फैलता है। जंक फूड और अत्यधिक मसालेदार भोजन बच्चों की सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है।
उन्होंने लोगों को तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी और मौसमी फलों का सेवन बढ़ाने की सलाह दी।


स्कूलों को भी बरतनी होगी सावधानी


चिकित्साधिकारी ने कहा कि हीट वेव के दौरान स्कूल प्रशासन की जिम्मेदारी भी काफी बढ़ जाती है। स्कूलों में बच्चों के लिए पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए।


उन्होंने कहा कि दोपहर के समय बच्चों को मैदान में खेलकूद कराने से बचना चाहिए। स्कूलों में प्राथमिक उपचार की व्यवस्था और ओआरएस उपलब्ध रहना चाहिए।
डॉ. सोनकर ने कहा कि यदि किसी बच्चे की तबीयत खराब होती है तो तुरंत उसके अभिभावकों को सूचना दी जाए और आवश्यक चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई जाए।


ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की जरूरत


उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी लोग गर्मी से होने वाली बीमारियों को लेकर पूरी तरह जागरूक नहीं हैं। कई बार लोग घरेलू उपचार में समय गंवा देते हैं, जिससे मरीज की हालत बिगड़ जाती है।
डॉ. सोनकर ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा गांव-गांव जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को भी लोगों को जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं।


बुजुर्गों और बीमार लोगों को भी खतरा


उन्होंने बताया कि सिर्फ बच्चे ही नहीं बल्कि बुजुर्ग और पहले से बीमार लोग भी हीट वेव की चपेट में जल्दी आते हैं। हृदय रोग, शुगर और ब्लड प्रेशर के मरीजों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को धूप में निकलने से बचना चाहिए और नियमित रूप से पानी पीते रहना चाहिए।


स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर


डॉ. अवनीत सोनकर ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा सभी अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को अलर्ट पर रखा गया है। गर्मी से संबंधित बीमारियों के इलाज के लिए जरूरी दवाएं और ओआरएस उपलब्ध कराए गए हैं।
उन्होंने कहा कि किसी भी आपात स्थिति में लोग नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर तुरंत संपर्क करें। समय पर इलाज मिलने से गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है।


अभिभावकों से विशेष अपील


डॉ. सोनकर ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा सिर्फ सरकार या स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि अभिभावकों को भी सजग रहना होगा। बच्चों को धूप में खेलने से रोकें, पर्याप्त पानी पिलाएं और उनके स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखें।
उन्होंने कहा कि यदि बच्चा सुस्त दिखाई दे, बार-बार उल्टी करे या चक्कर आने की शिकायत करे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।


?बचाव ही सबसे बड़ा उपचार?


अंत में चिकित्साधिकारी डॉ. अवनीत सोनकर ने कहा कि हीट वेव से डरने की नहीं बल्कि सतर्क रहने की जरूरत है। थोड़ी सी सावधानी और जागरूकता से बच्चों और परिवार को गंभीर बीमारियों से बचाया जा सकता है।


उन्होंने कहा कि गर्मी के इस मौसम में हर व्यक्ति को अपनी और अपने परिवार की सेहत का विशेष ध्यान रखना चाहिए। ?बचाव ही बेहतर स्वास्थ्य की कुंजी है? और यही संदेश हर गांव, हर घर तक पहुंचाना जरूरी है।