कागज़ों में विकास, ज़मीन पर परेशानी — ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा मार्ग पर श्रद्धालु बेहाल

ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा मार्ग को विकसित करने के लिए सरकारी स्तर पर बड़े दावे और पत्राचार किए गए, लेकिन आज भी अधिक मास में परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजा कान्त मिश्र द्वारा 18 अक्टूबर 2025 को जारी पत्र में गढ़या लतीफपुर, नगला छत्ती, बलरई, शाहपुर और झंडीपुर जैसे गांवों को जोड़ने वाले परिक्रमा मार्ग के विकास की आवश्यकता बताई गई थी। पत्र में कहा गया था कि सड़क और यमुना नदी पर पुल न होने के कारण परिक्रमा मार्ग बदल गया, जिससे इन गांवों का धार्मिक और आर्थिक महत्व प्रभावित हुआ। पत्र में खंदेरा घाट से नगला छत्ती के बीच यमुना नदी पर पॉन्टून पुल बनाए जाने तथा मार्ग को व्यवस्थित और विकसित करने की मांग की गई थी। इसके बाद लोक निर्माण विभाग (PWD) मथुरा द्वारा भी पत्र जारी कर मार्ग चौड़ीकरण और आगे की प्रशासनिक कार्यवाही की बात कही गई। विभागीय पत्र में राजस्व अभिलेखों के आधार पर सड़क की चौड़ाई तय करने और शासन को प्रस्ताव भेजने का उल्लेख किया गया। हालांकि स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का कहना है कि अब तक न तो पॉन्टून पुल बना और न ही मार्ग पूरी तरह विकसित हो सका है। अधिक मास के दौरान हजारों श्रद्धालु आज भी खराब और अव्यवस्थित रास्तों से गुजरने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से केवल कागज़ी कार्यवाही और आश्वासन दिए जा रहे हैं, जबकि ज़मीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर सरकारी पत्रों में किए गए वादे धरातल पर कब दिखाई देंगे और श्रद्धालुओं को सुरक्षित एवं सुगम परिक्रमा मार्ग कब मिलेगा।