चकिया ब्लॉक के मैनपुर में मनरेगा कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितता का आरोप,मस्टरोल में 444 मजदूर दर्ज, मौके पर नहीं दिखी उतनी संख्या

चकिया ब्लॉक के मैनपुर में मनरेगा कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितता का आरोप,मस्टरोल में 444 मजदूर दर्ज, मौके पर नहीं दिखी उतनी संख्या

चकिया। चकिया ब्लॉक की मैनपुर ग्राम पंचायत में मनरेगा कार्यों को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि मनरेगा के तहत चल रहे विकास कार्यों में वास्तविक स्थिति और सरकारी अभिलेखों में दर्ज आंकड़ों के बीच भारी अंतर है। आरोप है कि मस्टरोल में 444 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज की गई है, जबकि कार्यस्थल पर इतनी संख्या में श्रमिक दिखाई नहीं दे रहे हैं।

फर्जी मस्टरोल और फोटो अपलोडिंग पर उठे सवाल

एक ही मजदूर की फोटो कई बार इस्तेमाल किए जाने का आरोप

ग्रामीणों का दावा है कि ऑनलाइन मस्टरोल में दर्ज मजदूरों की उपस्थिति संदिग्ध प्रतीत होती है। आरोप लगाया गया है कि कुछ मामलों में एक ही मजदूर की तस्वीर का उपयोग एक से अधिक बार किया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि रिकॉर्ड और कार्यस्थल का भौतिक सत्यापन कराया जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।

अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल

ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच की उठाई मांग

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि शिकायतों के बावजूद अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। कुछ लोगों ने बीडीओ, एपीओ मनरेगा और संबंधित तकनीकी अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना का उद्देश्य ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराना और गांवों में विकास कार्य कराना है, लेकिन यदि आरोप सही हैं तो इससे योजना की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगते हैं।

प्रशासन से उच्चस्तरीय जांच की मांग

ग्रामीण बोले?दोषियों पर हो कार्रवाई

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभागीय अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि मस्टरोल, उपस्थिति फोटो, भुगतान रिकॉर्ड और कार्यस्थल का भौतिक सत्यापन कराया जाए। यदि जांच में अनियमितताएं साबित होती हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है ताकि पात्र मजदूरों को उनका अधिकार मिल सके और विकास कार्यों की गुणवत्ता बनी रहे।