शिक्षा विभाग या भ्रष्टाचार का अड्डा? शहाबगंज के कंपोजिट विद्यालय ठेकहा में प्रधानाध्यापक पर अनियमितता, वित्तीय गड़बड़ी और बच्चों से काम कराने के गंभीर आरोप

शहाबगंज/चंदौली। सरकारी विद्यालयों में बेहतर शिक्षा व्यवस्था और बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर कई विद्यालयों की स्थिति व्यवस्था की पोल खोलती नजर आ रही है। चकिया क्षेत्र के कंपोजिट विद्यालय ठेकहा में प्रधानाध्यापक अच्युतानंद त्रिपाठी पर गंभीर अनियमितताओं, वित्तीय गड़बड़ी और विद्यालय संचालन में लापरवाही के आरोप लग रहे हैं।

ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि विद्यालय शिक्षा का केंद्र कम और भ्रष्टाचार का अड्डा अधिक बनता जा रहा है। आरोप है कि प्रधानाध्यापक बिना अवकाश स्वीकृत कराए विद्यालय से गायब रहते हैं। न तो ऑनलाइन अवकाश दर्ज किया जाता है और न ही कोई लिखित सूचना दी जाती है। इसके बावजूद विभागीय स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही।

विद्यालय से गायब रहने का आरोप, स्थानीय लोगों के अनुसार

प्रधानाध्यापक कई बार पूरे दिन विद्यालय में उपस्थित नहीं रहते, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है।

एक अभिभावक ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया,

?बच्चे स्कूल पढ़ने जाते हैं, लेकिन कई बार प्रधानाध्यापक स्कूल में दिखाई ही नहीं देते। बच्चों की पढ़ाई भगवान भरोसे चल रही है।?

ग्रामीणों का कहना है कि यदि कोई शिक्षक नियमित रूप से अनुपस्थित रहता है तो इसकी जानकारी अधिकारियों को जरूर होती है, लेकिन कार्रवाई न होना विभागीय मिलीभगत की ओर संकेत करता है।

ICTC और यूको क्लब मद में वित्तीय अनियमितता के आरोप

विद्यालय में विभिन्न योजनाओं के तहत आने वाले धन के उपयोग को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि ICTC मद में आए धन का सही उपयोग नहीं किया गया। प्रधानाध्यापक द्वारा यह कहकर मामला टाल दिया जाता है कि सामान जिला स्तर से आएगा।

वहीं यूको क्लब के तहत पिछले वर्ष आए धन से कोई सामान नहीं खरीदा गया। इस वर्ष की धनराशि का भी उपयोग नहीं होने का आरोप है।

एक ग्रामीण ने कहा,

?सरकार बच्चों के विकास और गतिविधियों के लिए पैसा भेजती है, लेकिन यहां कोई सामान तक नहीं खरीदा गया।?

आंगनबाड़ी मद में भी गड़बड़ी का आरोप

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि करीब सात महीने पहले आंगनबाड़ी से संबंधित मद में धन आया था, लेकिन केवल 10 से 12 हजार रुपये का सामान खरीदकर बाकी धनराशि का गबन कर लिया गया।

हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन ग्रामीण निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

बच्चों से बर्तन धुलवाने का आरोप

विद्यालय में पढ़ाई के बजाय बच्चों से सफाई और बर्तन धुलवाने का भी आरोप लगाया गया है।

अभिभावकों का कहना है कि विद्यालय में छोटे बच्चों से प्रतिदिन मिड-डे मील के बर्तन साफ कराए जाते हैं, जो शिक्षा के अधिकार और बाल संरक्षण के नियमों के खिलाफ है।

एक महिला अभिभावक ने कहा,

?हम बच्चे पढ़ने भेजते हैं, लेकिन उनसे बर्तन धुलवाया जाता है। यह बेहद गलत है।?

MDM में भी घोटाले का आरोप

विद्यालय के मिड-डे मील (MDM) संचालन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि विद्यालय में प्रतिदिन लगभग 50 से 60 बच्चे ही उपस्थित रहते हैं, लेकिन रिकॉर्ड में 130 से 135 बच्चों की उपस्थिति दिखाई जाती है।

लोगों का कहना है कि अधिक बच्चों की संख्या दिखाकर खाद्यान्न और अन्य मदों में गड़बड़ी की जा रही है।

एक स्थानीय निवासी ने बताया,

?स्कूल में इतने बच्चे आते ही नहीं, जितनी हाजिरी लगाई जाती है। अगर जांच हो जाए तो पूरा मामला खुल जाएगा।?

?कोई मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकता? ? ग्रामीणों का आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि प्रधानाध्यापक राजनीतिक संरक्षण का हवाला देते हुए कार्रवाई से बचते रहे हैं। लोगों का कहना है कि वे खुद को प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से जुड़ा बताते हैं और कहते हैं कि कोई उनका कुछ नहीं कर सकता।

एक ग्रामीण ने कहा,

?बार-बार शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं होती। इससे लगता है कि ऊपर तक संरक्षण प्राप्त है।?

अधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि बिना विभागीय अधिकारियों की जानकारी के इतनी अनियमितताएं संभव नहीं हैं।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रधानाध्यापक और कुछ विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के कारण शिकायतों को नजरअंदाज किया जा रहा है।

खंड शिक्षा अधिकारी का बयान

जब इस मामले में खंड शिक्षाअधिकारी अजय कुमार से बात की गई तो उन्होंने कार्रवाई का आश्वासन दिया।

हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि शिकायतें पहले भी की गईं, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

एक अभिभावक ने कहा,

?हर बार जांच और कार्रवाई की बात होती है, लेकिन परिणाम कुछ नहीं निकलता।?

बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा असर

विद्यालय में अनियमितता और लापरवाही का सीधा असर बच्चों की शिक्षा पर पड़ रहा है।

अभिभावकों का कहना है कि गरीब परिवारों के बच्चे सरकारी विद्यालयों पर निर्भर हैं, लेकिन यहां शिक्षा का माहौल ही नहीं है।

एक छात्र के अभिभावक ने कहा,

?सरकार अच्छी शिक्षा देने की बात करती है, लेकिन यहां बच्चों को पढ़ाने वाला ही नहीं है। ऐसे में गरीब परिवारों के बच्चे कैसे आगे बढ़ेंगे??

सरकारी विद्यालयों से उठ रहा भरोसा

लगातार सामने आ रही लापरवाही और भ्रष्टाचार के कारण लोगों का भरोसा सरकारी विद्यालयों से उठता जा रहा है।

कई अभिभावक अब अपने बच्चों को निजी विद्यालयों में भेजने को मजबूर हैं, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह आसान नहीं है।

शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल

यह मामला केवल एक विद्यालय तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि पूरे शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।

शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बायोमेट्रिक उपस्थिति और नियमित निरीक्षण के बावजूद इस तरह की शिकायतें सामने आ रही हैं, तो यह व्यवस्था की गंभीर विफलता है।

ग्रामीणों की मांग

ग्रामीणों और अभिभावकों ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से मांग की है कि?

प्रधानाध्यापक की उपस्थिति रिकॉर्ड की जांच हो।

ICTC, यूको क्लब और आंगनबाड़ी मद की वित्तीय जांच कराई जाए।

MDM और छात्र उपस्थिति की जांच हो।

बच्चों से कराए जा रहे कार्यों की जांच हो।

दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

अब प्रशासन की कार्रवाई पर नजर

कंपोजिट विद्यालय ठेकहा का यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब लोगों की निगाहें जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं।

यदि निष्पक्ष जांच होती है तो विद्यालय में व्याप्त अनियमितताओं और कथित भ्रष्टाचार की सच्चाई सामने आ सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई ही सरकारी विद्यालयों में लोगों का विश्वास दोबारा कायम कर सकती है।