चकिया ब्लॉक बना मनरेगा में फर्जीवाड़े का हब फिरोजपुर गांव में 102 मजदूर केवल कागजों पर, फर्जी मस्टर रोल से सरकारी धन के बंदरबांट का आरोप

चकिया ब्लॉक बना मनरेगा में फर्जीवाड़े का हब
फिरोजपुर गांव में 102 मजदूर केवल कागजों पर, फर्जी मस्टर रोल से सरकारी धन के बंदरबांट का आरोप


चकिया/चंदौली। चकिया ब्लॉक में मनरेगा योजना में भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ताजा मामला फिरोजपुर गांव का है, जहां ग्राम प्रधान पर मनरेगा कार्यों में बड़े पैमाने पर धांधली करने का आरोप लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि यहां एक ही फोटो को बार-बार अपलोड कर फर्जी सॉफ्टवेयर के जरिए मस्टर रोल तैयार किए जा रहे हैं और सरकारी धन का बंदरबांट किया जा रहा है।


आरोप है कि फिरोजपुर गांव में मनरेगा के तहत 102 मजदूरों की उपस्थिति कागजों में दर्ज दिखाई जा रही है, जबकि मौके पर गिनती भर मजदूर ही कार्य करते नजर आते हैं। इससे साफ संकेत मिल रहा है कि बड़ी संख्या में मजदूर केवल रिकॉर्ड तक सीमित हैं और उनके नाम पर भुगतान निकाला जा रहा है।


एक ही फोटो से भरे जा रहे मस्टर रोल


ग्रामीणों के अनुसार मनरेगा पोर्टल पर मजदूरों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए एक ही मजदूर की तस्वीर को कई बार अलग-अलग नामों से अपलोड किया जा रहा है। इससे ऑनलाइन रिकॉर्ड में यह दिखाया जाता है कि कार्यस्थल पर बड़ी संख्या में मजदूर मौजूद हैं।


स्थानीय निवासी रामअवतार ने बताया,
?अगर कोई मौके पर जाकर जांच करे तो सच्चाई सामने आ जाएगी। कागजों में 100 से ज्यादा मजदूर दिखाए जाते हैं, लेकिन जमीन पर मुश्किल से 10-15 लोग काम करते हैं।?
एक अन्य ग्रामीण ने आरोप लगाया कि फर्जी सॉफ्टवेयर और तकनीकी हेरफेर के जरिए मस्टर रोल तैयार कर लाखों रुपये का भुगतान निकाला जा रहा है।


मजदूर कहीं और, हाजिरी कहीं और
ग्रामीणों का कहना है कि कई मजदूरों के नाम पर हाजिरी लगाई जा रही है, जबकि वे वास्तविक रूप से दूसरे स्थानों पर मजदूरी कर रहे होते हैं।


एपीओ, जेई, बीडीओ और ठेकेदार की मिलीभगत के आरोप


ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इस पूरे खेल में एपीओ मनरेगा, जेई, बीडीओ और ठेकेदार की मिलीभगत है। लोगों का कहना है कि बिना अधिकारियों की जानकारी और सहमति के इतने बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा संभव नहीं है।


एक स्थानीय युवक ने कहा,


?अगर अधिकारी ईमानदारी से जांच करें तो पूरा घोटाला सामने आ जाएगा, लेकिन शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं होती। इससे लगता है कि ऊपर तक सबकी मिलीभगत है।?
ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी मामले को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।


सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप


मनरेगा योजना का उद्देश्य ग्रामीण गरीबों को रोजगार देना और गांवों में विकास कार्य कराना है, लेकिन फिरोजपुर गांव में यह योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती दिखाई दे रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि कार्य कम और भुगतान ज्यादा दिखाया जा रहा है। इससे सरकारी धन का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हो रहा है।

ग्रामीणों में बढ़ता आक्रोश


लगातार सामने आ रही अनियमितताओं से ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच हो जाए तो करोड़ों रुपये के घोटाले का खुलासा हो सकता है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि?
कार्यस्थलों का भौतिक सत्यापन कराया जाए।
मस्टर रोल और भुगतान की जांच हो।
फर्जी फोटो और सॉफ्टवेयर की तकनीकी जांच की जाए।
दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जाए।


प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल


इस पूरे मामले ने प्रशासनिक निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि मौके पर मजदूर मौजूद नहीं हैं तो फिर ऑनलाइन हाजिरी कैसे लग रही है? यदि कार्य नहीं हुआ तो भुगतान किस आधार पर किया जा रहा है?
ये सवाल अब प्रशासन और संबंधित विभागों के सामने खड़े हैं।


कार्रवाई की मांग


ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन और शासन से मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।


लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी योजना गरीब मजदूरों के रोजगार का माध्यम बनने के बजाय भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा जरिया बन जाएगी।