नसरथा में मनरेगा कार्यों पर उठे गंभीर सवाल, फर्जी मस्टरोल और भ्रष्टाचार के आरोप से मचा हड़कंप, अधिकारियों के मिलीभगत से फर्जी सॉफ्टवेयर से फोटो अपलोड करने की चर्चा

नसरथा में मनरेगा कार्यों पर उठे गंभीर सवाल, फर्जी मस्टरोल और भ्रष्टाचार के आरोप से मचा हड़कंप

ग्रामीणों ने मनरेगा कार्यों में अनियमितताओं का लगाया आरोप

चकिया। ब्लॉक के नसरथा ग्राम पंचायत में मनरेगा कार्यों को लेकर बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम प्रधान द्वारा कथित रूप से फर्जी सॉफ्टवेयर के माध्यम से मस्टरोल भरकर सरकारी धन के दुरुपयोग का खेल किया जा रहा है। मामले को लेकर गांव में चर्चा तेज हो गई है तथा ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है।

70 मजदूरों की हाजिरी, लेकिन मौके पर नहीं दिखे श्रमिक

स्थानीय लोगों का कहना है कि 23, 24 और 25 तारीख को मनरेगा कार्यों में 70 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज की गई, जबकि धरातल पर इतनी संख्या में मजदूर दिखाई नहीं दिए। ग्रामीणों का आरोप है कि कागजों में मजदूरों की ?फौज? दौड़ रही है, लेकिन वास्तविक कार्यस्थल पर कुछ ही लोग मौजूद रहते हैं।

फोटो के बिना मस्टरोल भरने का आरोप

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि मनरेगा की ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली में बिना वास्तविक फोटो और सत्यापन के मजदूरों की हाजिरी दर्ज की गई। आरोप है कि मेनका देवी के नाम से बिना किसी वास्तविक उपस्थिति के मस्टरोल तैयार किया गया। इतना ही नहीं, कई मजदूरों की तस्वीरें दोबारा इस्तेमाल कर अलग-अलग दिनों में उपस्थिति दिखाई गई।

फर्जी सॉफ्टवेयर से फोटो अपलोड करने की चर्चा

गांव में यह भी चर्चा है कि कथित रूप से फर्जी सॉफ्टवेयर के माध्यम से मजदूरों की फोटो अपलोड कर ऑनलाइन रिकॉर्ड तैयार किए जा रहे हैं।

अधिकारियों की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ब्लॉक स्तर के कुछ अधिकारी और तकनीकी कर्मचारी शिकायतों के बावजूद मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि मनरेगा कार्यों में कमीशन आधारित व्यवस्था के चलते भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि बार-बार सूचना देने के बाद भी जांच केवल कागजों तक सीमित रह जाती है।

सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका

मनरेगा योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराना और विकास कार्यों को बढ़ावा देना है, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि नसरथा में यह योजना कथित रूप से कागजी खानापूर्ति और फर्जी मस्टरोल तक सीमित होकर रह गई है। इससे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका बढ़ गई है।


ग्रामीणों ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग

ग्रामीणों ने जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी तथा मनरेगा विभाग के उच्चाधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि कार्यस्थल का भौतिक सत्यापन कराया जाए, ऑनलाइन मस्टरोल और भुगतान अभिलेखों की जांच हो तथा दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।

जांच के बाद ही स्पष्ट होगी वास्तविकता

हालांकि लगाए गए आरोप स्थानीय ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं के हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले की वास्तविक स्थिति प्रशासनिक जांच और आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।