अन्नदाता की पुकार और कर्जमाफी की गूंज है - रोहित कुमार कनौजिया

देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले किसान आज एक बार फिर अपनी जायज मांगों को लेकर चर्चा में हैं। केंद्र सरकार की 'प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि' (PM-Kisan) योजना ने किसानों को एक संबल तो दिया है, लेकिन खेती की बढ़ती लागत और अनिश्चित मौसम के बीच यह सहायता ऊंट के मुंह में जीरे के समान साबित हो रही है। इसी क्रम में किसान नेता रोहित कुमार कनौजिया द्वारा उत्तर प्रदेश की योगी सरकार से 'किसान क्रेडिट कार्ड' (KCC) के कर्ज को माफ करने की मांग ने एक नई बहस छेड़ दी है।

सम्मान निधि और जमीनी हकीकत

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत किसानों को मिलने वाली 2,000 रुपये की किस्त खाद, बीज और सिंचाई के खर्चों के सामने बहुत कम पड़ती है। रोहित कुमार कनौजिया का तर्क है कि जहाँ यह योजना किसानों के दैनिक खर्चों में मदद करती है, वहीं KCC का भारी-भरकम कर्ज उनके भविष्य को अंधकारमय बना रहा है।

मुख्य बिंदु:

बढ़ती लागत: डीजल, उर्वरक और कीटनाशकों के दामों में वृद्धि ने खेती को घाटे का सौदा बना दिया है।

प्राकृतिक आपदा: बेमौसम बारिश और सूखे के कारण फसलें बर्बाद हो रही हैं, जिससे किसान कर्ज के चक्रव्यूह में फंसता जा रहा है।

कर्ज का बोझ: प्रदेश के लाखों किसान KCC के ब्याज और मूलधन के नीचे दबे हुए हैं।

योगी सरकार से उम्मीदें

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अपने पिछले कार्यकाल में लघु और सीमांत किसानों का कर्ज माफ कर एक बड़ी मिसाल पेश की थी। किसान नेता की ताजा मांग उसी उम्मीद को पुनर्जीवित करती है। कनौजिया का कहना है कि यदि प्रदेश और देश का किसान कर्जमुक्त होगा, तभी वह 'आत्मनिर्भर भारत' के सपने को सच कर पाएगा।

"जब तक अन्नदाता कर्ज के बोझ से दबा रहेगा, तब तक कृषि क्षेत्र में वास्तविक सुधार संभव नहीं है। सरकार को किस्त के साथ-साथ पूर्ण कर्जमाफी पर विचार करना चाहिए।" ? रोहित कुमार कनौजिया

चुनौतियां और समाधान

सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती वित्तीय संतुलन बनाए रखने की होती है। लेकिन यह भी सच है कि कॉर्पोरेट सेक्टर के एनपीए (NPA) को जिस तरह से नियंत्रित किया जाता है, उसी संवेदनशीलता की आवश्यकता कृषि क्षेत्र में भी है।

एकमुश्त समाधान: सरकार को KCC कर्ज माफी के लिए एक विशेष पैकेज की घोषणा करनी चाहिए।

ब्याज राहत: यदि पूर्ण माफी संभव न हो, तो कम से कम ब्याज दरों को शून्य करने या पुराने ब्याज को माफ करने पर विचार किया जाना चाहिए।

दीर्घकालिक नीति: किसानों को उनकी उपज का सही दाम (MSP) मिले, ताकि उन्हें भविष्य में कर्ज लेने की जरूरत ही न पड़े।

निष्कर्ष

किसान नेता रोहित कुमार कनौजिया की मांग केवल एक राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के लाखों किसानों की सामूहिक पीड़ा का स्वर है। योगी सरकार को इस दिशा में सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए ठोस कदम उठाने चाहिए। यदि अन्नदाता खुशहाल होगा, तभी प्रदेश विकास की नई ऊंचाइयों को छुएगा।

वक्त आ गया है कि 'सम्मान निधि' के साथ 'कर्ज मुक्ति' को भी प्राथमिकता दी जाए।