कबाड़ बेचकर जोधपुर मंडल ने कमाए 58 करोड़, लक्ष्य से 300% ज्यादा प्रदर्शन

कबाड़ बेचकर जोधपुर मंडल ने कमाए 58 करोड़, लक्ष्य से 300% ज्यादा प्रदर्शन

स्क्रैप निस्तारण से बढ़ी कमाई, सुरक्षा और स्वच्छता को मिला नया आधार

जोधपुर। उत्तर पश्चिम रेलवे के जोधपुर रेल मंडल ने वित्त वर्ष 2025-26 में स्क्रैप (कबाड़) निस्तारण के जरिए 58 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड राजस्व अर्जित कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यह आंकड़ा पिछले वित्त वर्ष की तुलना में करीब 43.48 करोड़ रुपये अधिक है, जिससे मंडल ने लगभग 300 प्रतिशत की प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की है।

मंडल रेल प्रबंधक अनुराग त्रिपाठी ने जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2025-26 के लिए मंडल को 15 हजार मीट्रिक टन स्क्रैप निस्तारण का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन जोधपुर मंडल ने लक्ष्य से आगे बढ़ते हुए 16,500 मीट्रिक टन कबाड़ का सफल निष्पादन कर नया रिकॉर्ड बना दिया।

डीआरएम अनुराग त्रिपाठी ने कहा कि यह उपलब्धि सिर्फ राजस्व बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सुरक्षित, स्वच्छ और आधुनिक रेलवे व्यवस्था की दिशा में एक मजबूत कदम है। उन्होंने बताया कि स्क्रैप हटाने की प्रक्रिया रेलवे सुरक्षा का अहम हिस्सा है, क्योंकि यार्ड, वर्कशॉप और ट्रैक के आसपास पड़े अनुपयोगी उपकरण कई बार दुर्घटनाओं का कारण बन जाते हैं।

उन्होंने इस सफलता पर मंडल के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि ?मिशन जीरो? की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी। भविष्य में भी पारदर्शिता, दक्षता और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए बेहतर परिणाम हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है।

नॉन-फेयर रेवेन्यू में बड़ी बढ़ोतरी

स्क्रैप निस्तारण से रेलवे की नॉन-फेयर रेवेन्यू (टिकट के अलावा होने वाली आय) में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इससे बुनियादी ढांचे के विकास और यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध होंगे।

पारदर्शी प्रक्रिया और बेहतर प्रबंधन से मिली सफलता

रेल मंडल ने स्क्रैप निस्तारण के लिए कई ठोस कदम उठाए, जिनमें प्रमुख हैं?

ई-ऑक्शन प्रणाली के जरिए पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी नीलामी

स्क्रैप की पहचान, वर्गीकरण और समयबद्ध निष्पादन

विभागों के बीच बेहतर समन्वय और सतत मॉनिटरिंग

पुराने रेल ट्रैक, सिग्नलिंग सामग्री, लोहे के उपकरण और अनुपयोगी मशीनरी का वैज्ञानिक तरीके से निष्कासन

दुर्घटनाओं और जोखिम में कमी

स्क्रैप हटने से रेलवे संचालन को कई फायदे हुए?

पटरियों, यार्ड और वर्कशॉप में पड़े अनुपयोगी लोहे व उपकरण हटने से दुर्घटना का खतरा कम हुआ

पुराने केबल, जंग लगे उपकरण और बेकार सामग्री हटने से फायर और शॉर्ट सर्किट की आशंका घट गई

यार्ड और स्टेशन क्षेत्र साफ रहने से निगरानी और निरीक्षण अधिक प्रभावी हो गया

कबाड़ के ढेर हटने से अवैध गतिविधियों और असामाजिक तत्वों पर रोक लगी

स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा

स्क्रैप निस्तारण से रेलवे परिसरों में साफ-सफाई और सुव्यवस्था में सुधार हुआ। साथ ही रीसाइक्लिंग के जरिए प्राकृतिक संसाधनों की बचत और औद्योगिक उपयोग में सामग्री लौटने से कार्बन फुटप्रिंट भी कम हुआ है।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, जोधपुर मंडल की यह उपलब्धि आने वाले वर्षों में अन्य मंडलों के लिए भी एक प्रेरणादायक मॉडल साबित हो सकती है।