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कांकरिया कोचिंग डिपो बना भारतीय रेलवे का पहला “वॉटर न्यूट्रल” डिपो

कांकरिया कोचिंग डिपो बना भारतीय रेलवे का पहला "वॉटर न्यूट्रल" डिपो

फाइटोरिमेडिएशन आधारित वेस्टवॉटर ट्रीटमेंट प्लांट से प्रतिदिन 1.60 लाख लीटर जल बचत

वार्षिक 5.84 करोड़ लीटर पानी संरक्षण कर अहमदाबाद मंडल ने रचा इतिहास

अहमदाबाद। पश्चिम रेलवे का अहमदाबाद मंडल एक बार फिर नवाचार और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में देशभर में अग्रणी साबित हुआ है। कांकरिया कोचिंग डिपो (KKF) में फाइटोरिमेडिएशन तकनीक पर आधारित अत्याधुनिक वेस्टवॉटर ट्रीटमेंट प्लांट और एनवायरनमेंट पार्क के सफल संचालन के बाद यह डिपो भारतीय रेलवे का पहला ?वॉटर न्यूट्रल? डिपो बन गया है। यह उपलब्धि न केवल रेलवे के लिए ऐतिहासिक मानी जा रही है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक बड़ा कदम साबित हुई है।

मंडल रेल प्रबंधक वेद प्रकाश ने जानकारी देते हुए बताया कि कांकरिया कोचिंग डिपो में स्थापित अत्याधुनिक Effluent Treatment Plant (ETP) के माध्यम से प्रतिदिन लगभग 1.60 लाख लीटर पानी की बचत हो रही है। इसका वार्षिक आंकड़ा करीब 5,84,00,000 लीटर यानी 5.84 करोड़ लीटर जल संरक्षण के बराबर है। इस उपचारित पानी का उपयोग कोच वॉशिंग सहित अन्य तकनीकी कार्यों में दोबारा किया जा रहा है, जिससे भूजल पर निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आई है।

यह प्लांट प्रतिदिन पिट लाइन से करीब 120 KLD तथा मैकेनाइज्ड लॉन्ड्री से करीब 100 KLD गंदे पानी का उपचार करता है। उत्तर और दक्षिण दिशा के कलेक्शन पिट से पानी को पंपिंग कर प्राथमिक संग्रह टैंकों में लाया जाता है, जहां बहु-स्तरीय वैज्ञानिक प्रक्रिया के माध्यम से शुद्धिकरण शुरू होता है। प्रारंभिक चरण में स्क्रीनिंग और प्राथमिक ट्रीटमेंट द्वारा ठोस कचरे को अलग किया जाता है। इसके बाद पानी को लगभग 20 घंटे की रिटेंशन क्षमता वाले होल्डिंग टैंक में रखा जाता है, फिर इसे 24 घंटे की प्रक्रिया वाले वेटलैंड सेल्स से गुजारा जाता है।

यह परियोजना भारतीय रेलवे में पर्यावरणीय इंजीनियरिंग का एक उत्कृष्ट उदाहरण मानी जा रही है, जहां "Constructed Wetlands"तकनीक के माध्यम से प्राकृतिक तरीके से गंदे पानी का शुद्धिकरण किया जाता है। इस प्रणाली में पौधों और प्राकृतिक प्रक्रियाओं की मदद से पानी को साफ किया जाता है, जो न केवल ऊर्जा दक्ष है, बल्कि पूरी तरह ग्रीन और टिकाऊ भी है। यह व्यवस्था NGT और CPCB के मानकों के अनुरूप है, जिससे पर्यावरणीय अनुपालन भी सुनिश्चित होता है।

आगे की प्रक्रिया में कार्बन और सैंड फिल्ट्रेशन के बाद UV आधारित डिसइन्फेक्शन तकनीक के जरिए पानी को पूरी तरह सुरक्षित बनाया जाता है। उपचारित पानी को अंतिम टैंकों में संग्रहित किया जाता है, जहां एक टैंक पंपिंग के लिए और दूसरा सौंदर्यात्मक उपयोग के लिए निर्धारित है। इसके बाद प्रेशर पंप के माध्यम से यह पानी पुनः पिट लाइनों में भेज दिया जाता है।

गौरतलब है कि पहले कोच वॉशिंग से निकलने वाला गंदा पानी सीधे अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन की ड्रेनेज लाइनों में प्रवाहित कर दिया जाता था। इसी समस्या के समाधान के लिए यह पर्यावरण अनुकूल तकनीक प्रस्तावित की गई और अब इसे सफलतापूर्वक लागू कर दिया गया है।

कांकरिया कोचिंग डिपो में लगाया गया यह अत्याधुनिक ETP प्लांट पश्चिम रेलवे ही नहीं, बल्कि पूरे भारतीय रेलवे के लिए एक मॉडल परियोजना के रूप में उभरकर सामने आया है। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि यह पहल आने वाले समय में अन्य डिपो और स्टेशनों पर भी इसी तरह की तकनीक अपनाने के लिए प्रेरणा बनेगी।

अहमदाबाद मंडल की यह पहल "हरित रेलवे "सतत भविष्य" की दिशा में एक मजबूत कदम है। कांकरिया कोचिंग डिपो का"वॉटर न्यूट्रल"बनना भारतीय रेलवे की प्रगतिशील सोच और पर्यावरणीय प्रतिबद्धता का प्रतीक बनकर सामने आया है।