हाइटेक शिक्षा के नाम पर अभिभावकों का शोषण? चंदौली के निजी स्कूलों पर उठे गंभीर सवाल

हाइटेक शिक्षा के नाम पर अभिभावकों का शोषण? चंदौली के निजी स्कूलों पर उठे गंभीर सवाल


चंदौली। जनपद में निजी (कन्वेंट) स्कूलों की कार्यप्रणाली एक बार फिर विवादों में है। अभिभावकों ने आरोप लगाया है कि हाइटेक और बेहतर शिक्षा के नाम पर स्कूल प्रबंधन द्वारा मनमानी वसूली की जा रही है, जिससे आम परिवारों पर आर्थिक बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है।


फीस के साथ अतिरिक्त खर्च का दबाव


अभिभावकों का कहना है कि महंगी ट्यूशन फीस के अलावा स्कूलों द्वारा कॉपी-किताबें, यूनिफॉर्म और अन्य शैक्षणिक सामग्री भी निर्धारित दुकानों से ही खरीदने के लिए बाध्य किया जाता है। बाजार में वही सामग्री सस्ती होने के बावजूद अभिभावकों को अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।


?शिक्षा नहीं, व्यवसाय बन गया है स्कूल?


स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई निजी स्कूलों ने शिक्षा को सेवा के बजाय व्यवसाय का रूप दे दिया है। बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित अभिभावक मजबूरी में स्कूलों की शर्तें मानने को विवश हैं।


हाइटेक सुविधाओं के नाम पर बढ़ती फीस


स्मार्ट क्लास, डिजिटल बोर्ड और इंग्लिश मीडियम शिक्षा का हवाला देकर फीस में लगातार बढ़ोतरी की जा रही है। हालांकि, कई अभिभावकों का सवाल है कि क्या इन सुविधाओं के अनुरूप शिक्षा की गुणवत्ता भी दी जा रही है, या यह सिर्फ अतिरिक्त वसूली का माध्यम बन चुका है।


नियमों की अनदेखी के आरोप


शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार किसी भी स्कूल को अभिभावकों को किसी विशेष दुकान से किताबें या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य करने का अधिकार नहीं है। इसके बावजूद जनपद में कई स्कूल खुलेआम इन नियमों की अनदेखी कर रहे हैं।


प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग


इस मामले को लेकर अभिभावकों और जागरूक नागरिकों ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से हस्तक्षेप की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगें हैं?
स्कूलों द्वारा मनमाने ढंग से तय दुकानों से खरीद की अनिवार्यता समाप्त की जाए
फीस और अन्य शुल्कों की जांच कराई जाए
नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर सख्त कार्रवाई की जाए।


अभिभावकों की बढ़ती चिंता


लगातार बढ़ती फीस और अतिरिक्त खर्चों के कारण मध्यम वर्गीय परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। कई अभिभावक अपने बच्चों की पढ़ाई जारी रखने को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं।

अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग इस गंभीर मुद्दे पर कितना संज्ञान लेते हैं और क्या वास्तव में अभिभावकों को राहत मिल पाती है या नहीं। चंदौली में शिक्षा के नाम पर बढ़ती व्यावसायिकता एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है।