रन फॉर अम्बेडकर’ से गूंजा मुगलसराय, हजारों लोगों ने भरी समानता की दौड़

चंदौली ।संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जयंती के उपलक्ष्य में अप्रैल माह को अम्बेडकर माह के रूप में मनाने की शुरुआत बुधवार को जनपद चंदौली में भव्य तरीके से की गई। रन फॉर अम्बेडकर के तहत आयोजित विशाल मैराथन और जागरूकता रैली ने मुगलसराय की सड़कों पर सामाजिक समानता, एकता और उत्साह का संदेश दिया।

दोपहर 3 बजे मुगलसराय के दामोदर दास पोखरा से मैराथन का शुभारंभ हुआ, जो मानसरोवर तक आयोजित की गई। इस दौरान युवाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, कर्मचारियों और आम नागरिकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। रन फॉर इक्वलिटी? और रन फॉर फ्रेटरनिटी की थीम पर आयोजित इस दौड़ के दौरान पूरा मार्ग जय भीम और बाबा साहब के विचारों से गुंजायमान रहा

कार्यक्रम का शुभारंभ परमपूज्य भिख्खू संघ द्वारा मंगलकामनाओं के साथ किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता दिनेश चन्द्र (पूर्व वरिष्ठ राजभाषा अधिकारी, डीडीयू रेल मंडल) ने की। मुख्य अतिथि के रूप में बुद्ध मित्र मुसाफिर उपस्थित रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में अशोक कुमार प्रबुद्ध समेत कई गणमान्य लोगों ने कार्यक्रम को संबोधित किया।

वक्ताओं ने 1 अप्रैल के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसी दिन वर्ष 1935 में भारतीय रिजर्व बैंक की स्थापना हुई थी। उन्होंने कहा कि आरबीआई की अवधारणा डॉ. अम्बेडकर के प्रसिद्ध शोधThe Problem of the Rupeeसे प्रेरित थी। इस कारण 1 अप्रैल को अम्बेडकर माह की शुरुआत के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है।

इस आयोजन का नेतृत्व अखिल भारतीय अनुसूचित जाति/जनजाति कर्मचारी कल्याण एसोसिएशन (ABAJKA) की जनपद शाखा चंदौली ने किया। कार्यक्रम में RAMA (रमाबाई अम्बेडकर महिला एसोसिएशन), उत्तर प्रदेश शिक्षक महासभा, BBSS (बहुजन बौद्ध समाज संघर्ष समिति) और AIDASA चंदौली सहित कई सामाजिक संगठनों का सहयोग रहा।

आयोजकों ने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य केवल दौड़ आयोजित करना नहीं, बल्कि बाबा साहब के मूल मंत्र शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो? को जन-जन तक पहुंचाना है। इस आयोजन के माध्यम से सामाजिक समानता, बंधुत्व और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने का संदेश दिया गया।

आयोजकों ने बताया कि ?अम्बेडकर माह? के तहत अप्रैल माह में जिले के विभिन्न स्थानों पर शैक्षिक, सामाजिक और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे नई पीढ़ी को बाबा साहब के विचारों और उनके संघर्षों से जोड़ा जा सके।

इस दौरान हजारों लोगों की भागीदारी ने यह साबित कर दिया कि बाबा साहब के विचार आज भी समाज को जोड़ने और समानता की राह दिखाने में प्रासंगिक हैं।