काम के दिन को घटाने और सबको रोजगार के लिये किया प्रदर्शन 

देश भर में श्रम कानून को बदलने के विरोध में केंद्रीय तथा राज्य स्तरीय ट्रेड यूनियन के कार्यकर्ताओं के द्वारा नए श्रम कानून जिसके अनुसार काम का दिन 8 घंटे से बढ़ाकर 12 तथा किसी भी संस्थान में श्रमिक यूनियन बनाना ज्यादा कठिन कर दिया गया है। न्यूनतम मजदूरी कानून में शिथलता दी गई है। इसलिए देश भर में किए जा रहे प्रदर्शनों की कड़ी में श्रीगंगानगर के श्रीकरणपुर में भगत सिंह चौक पर प्रदर्शन किया गया। इसमें मांग की गई कि काम के दिन को 8 घंटे से घटाकर 6 घंटे करने, नरेगा कानून में 200 दिन का काम तथा ₹1000 न्यूनतम मजदूरी करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किये जा रहे है। मजदूर वर्ग पहले से ही आर्थिक तंगियों से जूझ रहा है ऐसी स्थिति में रोजगार की मांग प्रत्येक स्थान पर उठाई जा रही है। श्रीकरणपुर के भगत सिंह चौक पर ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन की छात्र नेता सुमन कंवर, रजनदीप कौर, नरेगा मजदूर यूनियन(एटक) के सचिव भीखाराम, कारपेंटर यूनियन के अध्यक्ष हरेन्द्र दिलशान, हरदेव सिंह तथा जसवीर जस्सी, तारा सिंह रामगढ़िया, टेंपो यूनियन के सचिव प्रकाश सिंह, नौजवान सभा के सचिव नवजोत सिंह के नेतृत्व में जोरदार प्रदर्शन किया गया तथा मांग की गई कि सबको रोजगार देने के लिए संसद में भगत सिंह राष्ट्रीय रोजगार गारंटी कानून पारित किया जाए और काम के दिन को 12 घंटे नहीं बल्कि 6 घंटे किया जाए।

इस सभा को संबोधित करते हुए सेवानिवृत अध्यापक सरदूल सिंह ने कहा कि एक तरफ तकनीक ने एआई तक की उन्नति कर ली है जिस कारण हजारों आदमियों का काम एक आदमी तथा महीनों का काम कुछ क्षणों में ही किया जा सकता है। उन्नत तकनीक के कारण खेतों और फैक्ट्रीयों में काम के अवसर सीमित कर दिए गए हैं जिससे लोगों की क्रय शक्ति न्यूनतम स्तर पर आ गई है जिससे बाजार में माल भी बंद हो गया है। इसलिए संसद में भगत सिंह राष्ट्रीय रोजगार कानून (बनेगा) पारित कर सबको रोजगार की गारंटी दी जाए। भगत सिंह ने भी 8 अप्रैल 1929 को देश की संसद में धमाका कर इस बात को जोर देते हुए कहा था कि श्रमिक विरोधी कानूनों को रद्द किया जाए और उसके स्थान पर श्रमिकों के हितों, नौजवानों के रोजगार गारंटी वाले कानून पारित किए जाएं। यही देश की सबसे बड़ी जरूरत है। यही भगत सिंह और उनके साथियों को याद करने का अर्थ है।