पत्रकार आंदोलन की चिंगारी को ज्वालामुखी बनाने पर तुली राजस्थान सरकार

रकार ने ही भड़का दिया पत्रकारों का गुस्सा: जयपुर में पत्रकारों का आंदोलन विकराल रुप की ओर अग्रसर, भजनलाल सरकार के गले की फांस बनता जा रहा पत्रकार आंदोलन

राजधानी जयपुर की सड़कों पर सोमवार को उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब सैकड़ों पत्रकारों ने सिस्टम के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया। मामला सिर्फ विरोध का नहीं था, बल्कि यह पत्रकारों की अस्मिता और आजीविका से जुड़ा आक्रोश था, जो सेंट्रल पार्क गेट नंबर 01 से उठकर अब शहीद स्मारक तक पहुंच चुका है।

(क्या है पूरा मामला?)
आईएफडब्ल्यूजे (Indian Federation of Working Journalists) के आह्वान पर प्रदेशभर से पत्रकार जयपुर पहुंचे। आरोप है कि प्रशासन की आड़ में पत्रकारों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है और झूठे मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। जैसलमेर में 22 साल से संचालित एक रिसोर्ट पर हाल ही में बुलडोजर चलाने की घटना ने इस आक्रोश को और भड़का दिया। पत्रकारों का कहना है कि यह कार्रवाई सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि प्रेस की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है।

(सरकार के ढुलमुल रवैया एवं इंतजार से और बढ़ा गुस्सा)
पत्रकारों को मुख्यमंत्री से मिलने के लिए शाम 5 बजे का समय दिया गया था, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली। इससे नाराज पत्रकारों ने शहीद स्मारक पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया और आज उसका दूसरा दिन है, उन्होंने इसे लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की अनदेखी बताया।
(आईएफडब्ल्यूजे के प्रदेश अध्यक्ष उपेन्द्र सिंह राठौड़ ने कहा )
?जब पत्रकारों को ही इस तरह कई कई दिनों तक इंतजार करवाया जाए, और वो भी मुख्यमंत्री के नाम लगभग दो सौ से भी अधिक ज्ञापन सौंपने के बाद भी, तो आम जनता की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।?
(अब क्या होगा?)
लगातार उपेक्षा से आहत संगठन ने अब बड़ा फैसला लिया है? शहीद स्मारक पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू हो चुका है।
यह धरना सिर्फ एक विरोध नहीं, बल्कि चेतावनी है कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो आंदोलन और व्यापक हो सकता है।

(निष्कर्ष )
जयपुर का यह आंदोलन अब एक बड़े संघर्ष का रूप लेता दिख रहा है। सवाल सिर्फ एक रिसोर्ट या कुछ मुकदमों का नहीं, बल्कि पत्रकारों की स्वतंत्रता और सम्मान का है। आने वाले दिनों में सरकार का रुख तय करेगा कि यह आंदोलन कितना लंबा और कितना प्रभावशाली होगा।