रेलवे ने सुरक्षा बढ़ाने के लिए 16,398 किमी ट्रैक के किनारे की फेंसिंग, तेज रफ्तार मार्गों पर खास ध्यान

नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने ट्रेन संचालन को और अधिक सुरक्षित बनाने के लिए देशभर में बड़े स्तर पर रेल पटरियों के किनारे सुरक्षा घेराबंदी (फेंसिंग) का काम किया है। अब तक विभिन्न रेलवे जोनों में कुल 16,398 किलोमीटर ट्रैक के किनारे फेंसिंग की जा चुकी है, जिससे अतिक्रमण रोकने और दुर्घटनाओं में कमी लाने में मदद मिल रही है।

रेलवे के अनुसार, जिन मार्गों पर ट्रेनों की गति 110 किमी प्रति घंटे से अधिक है, वहां विशेष रूप से फेंसिंग की जा रही है। इसके साथ ही संवेदनशील स्थानों पर भी यह व्यवस्था लागू की जा रही है, ताकि मवेशियों, पैदल यात्रियों और छोटे वाहनों के कारण होने वाले हादसों को रोका जा सके। यात्रियों और स्थानीय लोगों की सुविधा के लिए कई स्थानों पर फेंसिंग के साथ पैदल यात्री सबवे भी बनाए जा रहे हैं।

फेंसिंग के मामले में उत्तर मध्य रेलवे सबसे आगे है, जहां 2,721 किलोमीटर ट्रैक के किनारे घेराबंदी की गई है। इसके बाद दक्षिण मध्य रेलवे में 2,326 किलोमीटर और पश्चिमी रेलवे में 2,257 किलोमीटर फेंसिंग का कार्य पूरा किया गया है।

वहीं, महाराष्ट्र के व्यस्त लोनावला-पुणे-दौंड रेल मार्ग पर भी सुरक्षा को लेकर बड़ा प्रोजेक्ट चल रहा है। इस मार्ग पर ₹209.38 करोड़ की लागत से करीब 290 किलोमीटर फेंसिंग और पैदल यात्री सबवे निर्माण का कार्य स्वीकृत किया गया है। अब तक इस परियोजना के तहत लगभग 150 किलोमीटर फेंसिंग पूरी हो चुकी है और शेष कार्य तेजी से जारी है।

रेलवे के अलग-अलग जोनों में की गई फेंसिंग में उत्तर पश्चिम रेलवे (1,539 किमी), पश्चिम मध्य रेलवे (1,415 किमी), मध्य रेलवे (966 किमी), दक्षिण रेलवे (827 किमी) और उत्तर रेलवे (736 किमी) भी प्रमुख रूप से शामिल हैं।

इस संबंध में जानकारी देते हुए अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में बताया कि रेलवे सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और भविष्य में भी ऐसे कदम लगातार उठाए जाते रहेंगे, ताकि ट्रेन संचालन पूरी तरह सुरक्षित और सुचारु बना रहे।