वैकल्पिक घरेलू ईंधन की पूर्ति पशुपालन से संभव -निशाकान्त तिवारी

देवरिया। आज जब अमेरिका ईरान युद्ध के कारण भारत में घरेलू ईंधन के लिए एलपीजी गैस की समस्या उत्पन्न हो गई तब पुनः घरेलू ईंधन के वैकल्पिक व्यवस्था के बारे में सोचने की आवश्यकता है। इस संबंध में पशुधन प्रसार अधिकारी निशाकान्त तिवारी ने बताया कि विशेषकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी भारत में घरेलू ईंधन की पूर्ति में पशुपालन एक महत्वपूर्ण और टिकाऊ भूमिका निभा सकता है। यह न केवल ऊर्जा का सस्ता स्रोत प्रदान करता है, बल्कि एलपीजी जैसे पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करके आत्मनिर्भरता भी बढ़ाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं के गोबर का उपयोग मुख्य रूप से उपले बनाने में किया जाता है, जो खाना पकाने के लिए ईंधन का एक प्रमुख और सस्ता स्रोत है।पशुओं के गोबर का उपयोग बायोगैस प्लांट के माध्यम से जैव-ईंधन के रूप में किया जा सकता है। यह स्वच्छ ऊर्जा प्रदान करता है, जिससे रसोई में धुआं नहीं होता और खाना पकाने, सब्जियां पकाने व रोटियां बनाने में इसका उपयोग होता है। गोबर गैस संयंत्रों से रसोई तक पाइप के माध्यम से ईंधन पहुँचता है, जिससे गैस सिलेंडर पर खर्च कम होता है। यह पशु अपशिष्ट (गोबर) के कुशल प्रबंधन का एक तरीका है, जो पर्यावरण को साफ रखने के साथ-साथ उपयोगी ऊर्जा प्रदान करता है। बायो गैस प्लांट को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की आवश्यकता है जो ईंधन सुरक्षा प्रदान करने में एक आत्मनिर्भर प्रणाली के रूप में कार्य कर सकता है।