न्याय के मंदिर में ‘फर्जी वकालत’ का खेल? दो नाम,दो पहचान और मुकदमों का जाल!

🚨 बड़ी खबर: शुक्लागंज, जनपद उन्नाव

न्याय के मंदिर में ?फर्जी वकालत? का खेल? दो नाम,दो पहचान और मुकदमों का जाल!

पत्रकार नफीस खान ने उठाए 9 तीखे सवाल, जिला जज से की शिकायत - सुरक्षा की भी लगाई गुहार

उन्नाव:
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न्याय के मंदिर कहे जाने वाले अदालत परिसर में काला कोट पहनकर कानून की आंखों में धूल झोंकने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। कथित वकील अलीशा अंसारी पर फर्जी दस्तावेजों के सहारे वकालत करने, दो अलग-अलग पहचान का इस्तेमाल करने और निर्दोष लोगों को झूठे मुकदमों में फंसाकर उगाही करने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं।

इस पूरे मामले का खुलासा करते हुए पत्रकार नफीस खान ने माननीय जिला जज उन्नाव को एक विस्तृत प्रार्थना पत्र सौंपकर उच्च स्तरीय जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की है।


⚖️ दो चेहरों वाली वकील का सच?

शिकायती पत्र के अनुसार एक ही महिला ?अलीशा अंसारी? और ?फिरदौस परवीन? नाम की दो अलग-अलग पहचान का इस्तेमाल कर रही है।

आरोप है कि?

पैन कार्ड,आधार कार्ड,बैंक खाता,शैक्षिक प्रमाणपत्र,बार काउंसिल पंजीकरण जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों में कूटरचना और हेरफेर कर अदालत में वकालत की जा रही है।
यह भी दावा किया गया है कि महिला अपनी सौतेली बहन के नाम और पंजीकरण का सहारा लेकर अदालत में पैरवी कर रही है, जबकि बार काउंसिल उत्तर प्रदेश में इस नाम और पते से कोई वैध अधिवक्ता दर्ज नहीं है।

❓ पत्रकार नफीस खान के 9 तीखे सवाल

पत्रकार ने जिला जज के सामने कई अहम बिंदुओं पर जांच की मांग की है_

1️⃣ पैन कार्ड की सत्यता- कानपुर नगर से जारी पैन कार्ड की विभागीय जांच
2️⃣ बैंक खाते का रहस्य- एसबीआई शुक्लागंज में अलीशा अंसारी के खाते की जांच
3️⃣ पुराने मुकदमों का इतिहास - वर्ष 2013 के कानपुर न्यायालय के केस की फाइल
4️⃣ पहचान का खेल - बिल्हौर तहसील से नाम परिवर्तन के कूटरचित प्रमाणपत्र
5️⃣ दोहरा पंजीकरण- उन्नाव कोर्ट में दो अलग-अलग नामों से वकालत
6️⃣ शैक्षिक योग्यता- हाईस्कूल मार्कशीट और एलएलबी डिग्री की जांच
7️⃣ बार काउंसिल रजिस्ट्रेशन - वास्तविक अधिवक्ता होने की पुष्टि
8️⃣ पारिवारिक दस्तावेज - मुन्नी बेगम के दोनों विवाह से संबंधित संतानों के रिकॉर्ड का मिलान
9️⃣ पुराने मामलों की भूमिका- किन-किन मुकदमों में पैरवी की गई


⚠️ कानून का चोला, अपराध का खेल?

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इस कथित फर्जी वकील ने कानून का चोला पहनकर कई निर्दोष लोगों पर धारा 376, 354, 392 और 394 जैसे गंभीर मामलों में झूठे मुकदमे दर्ज कराए, ताकि लोगों को डराकर उनसे मोटी रकम वसूली जा सके।

यदि यह आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला सिर्फ फर्जी वकालत का नहीं बल्कि न्याय व्यवस्था के साथ बड़ा खिलवाड़ माना जाएगा।

🛑 पत्रकार ने मांगी सुरक्षा

इस पूरे कथित नेटवर्क का खुलासा करने वाले पत्रकार नफीस खान ने अपनी जान को खतरा बताते हुए उन्नाव पुलिस प्रशासन से सुरक्षा की मांग भी की है।
बताया जा रहा है कि माननीय जिला जज ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दस्तावेजों की जांच और वैधानिक कार्रवाई कराने का आश्वासन दिया है।

🔥 बड़ा सवाल

अगर अदालत में बैठकर कोई गैर-अधिवक्ता मुकदमों का जाल बुन रहा है, तो यह न्याय व्यवस्था और लोकतंत्र दोनों के लिए खतरे की घंटी है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि उन्नाव पुलिस और न्यायिक तंत्र इस ?दोहरी पहचान वाली वकील? के चेहरे से नकाब कब हटाता है?