कोटवार संघ ने विधानसभा सत्र में मांगों पर अमल की उठाई मांग

बैकुंठपुर। प्रदेश के कोटवारों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर शासन से शीघ्र निर्णय लेने की अपील की है। संघ की ओर से करबद्ध निवेदन करते हुए कहा गया है कि कोटवार पीढ़ी दर पीढ़ी शासन की सेवा करते आ रहे हैं, बावजूद इसके उन्हें आज भी शासकीय कर्मचारियों जैसा दर्जा और सुविधाएं प्राप्त नहीं हैं। संघ का कहना है कि भूमिहीन कोटवार वर्षों से आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। कम मानदेय के कारण सम्मानजनक जीवन यापन करना कठिन हो गया है, जिससे प्रदेशभर में असंतोष का माहौल बन रहा है। संघ ने मांग की है कि आगामी विधानसभा सत्र 2026-27 के दौरान उनकी मांगों पर अमल करते हुए शासनादेश जारी किया जाए।

प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं ?

कोटवारों को शासकीय कर्मचारी का दर्जा देकर नियमित किया जाए। जब तक नियमितीकरण न हो, तब तक मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि की जाए।

भूमिहीन कोटवारों का मानदेय 6000 रुपये से बढ़ाकर 21000 रुपये किया जाए।

3 एकड़ सेवा भूमि वाले कोटवारों का मानदेय 5500 रुपये से बढ़ाकर 18000 रुपये किया जाए।

5 से 7 एकड़ सेवा भूमि वाले कोटवारों का मानदेय 4500 रुपये से बढ़ाकर 15000 रुपये किया जाए।

10 एकड़ से अधिक सेवा भूमि वाले कोटवारों का मानदेय 3000 रुपये से बढ़ाकर 12000 रुपये किया जाए।

मध्यप्रदेश की तर्ज पर छत्तीसगढ़ के कोटवारों को भी खाकी रंग की अच्छी गुणवत्ता वाली वर्दी उपलब्ध कराई जाए।वर्दी सिलाई भत्ता 275 रुपये से बढ़ाकर 1000 रुपये प्रतिवर्ष किया जाए तथा प्रत्येक तीन वर्ष में एक गरम कोट प्रदान किया जाए।संघ ने कहा है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लिया जाता है तो कोटवारों को सम्मानजनक जीवन यापन का अवसर मिलेगा। संघ ने शासन से सहृदयता पूर्वक विचार कर शीघ्र आदेश जारी करने की मांग की है।