बैंगलोर से कश्मीर तक विदेशी सांडों का ऐतिहासिक सफर; बडगाम रेलवे स्टेशन पहुँचा पहला पशुधन पार्सल! सीनियर डीसीएम उचित सिंघल,,,,,,,

जम्मू, उत्तर रेलवे का जम्मू मंडल माल दुलाई के क्षेत्र में दिन ब दिन नई क्रांति के साथ ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए, अपनी प्रगति की और आगे बढता जा रहा हैं। अब तक केवल माल ढुलाई ऑटोमोबाइल, सेब, स्टील, अनाज आदि के लिए उपयोग की जाने वाली मालगाड़ियों, का उपयोग विशेष पहल के साथ पार्सल वैन द्वारा अब पशु परिवहन के लिए भी किया जा रहा है। बैंगलोर से जम्मू कश्मीर के लिए कुल 23 विदेशी नस्ल के सांडो को लाया गया । इन कीमती पशुओं को सुरक्षित रूप से रेलवे की पार्सल वैन के माध्यम से लंबी दूरी तय करके कश्मीर पहुंचाया गया। यह पहल रेलवे द्वारा कृषि और पशुपालन विभाग की प्रजनन विकास योजना (Breeding Development Program) का हिस्सा है। जिसका परिणाम हैं, कि जम्मू मंडल ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए, बैंगलोर (कर्नाटक) से विदेशी नस्ल के सांडों की पहली खेप को कश्मीर पहुचाकर, पशुओ की उपलब्धता को सुगम बनाएगा। इन 23 विदेशी सांडो में से को 06 बारी ब्राह्मणा गुड्स शेड व अन्य 17 विदेशी सांडों को बडगाम गुड्स शेड में उतरा गया, यह ऐतिहासिक परिवहन न केवल लॉजिस्टिक्स की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि कश्मीर की डेयरी अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाला कदम साबित होगा।

महत्त्वपूर्ण पहलुओ पर नज़र डाले तो,

पहली बार है जब इतनी लंबी दूरी (बैंगलोर से कश्मीर) तक पशुधन का परिवहन पार्सल वैन के माध्यम से किया गया है।

बैंगलोर से रवाना होकर यह पार्सल ट्रेन देश के विभिन्न राज्यों को पार करती हुई उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) के जरिए बडगाम पहुँची है।

यात्रा के दौरान पशुओं के कल्याण के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (BSI) के कड़े मापदंडों और विशेष चेंबरों का उपयोग किया गया, ताकि सांडों को शारीरिक क्षति या तनाव न हो।

इस विशेष पशु मालढुलाई पर वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक जम्मू,उचित सिंघल ने बताया, " कि

इन उच्च गुणवत्ता वाले विदेशी सांडों के आगमन से कश्मीर में पशुओं की स्थानीय नस्लों में सुधार होगा, जिससे दूध उत्पादन की क्षमता में भारी वृद्धि होगी। रेलवे द्वारा परिवहन से सड़क मार्ग की तुलना में न केवल खर्च कम हुआ है, बल्कि प्रतिकूल मौसम में भी सुरक्षित और समय पर डिलीवरी सुनिश्चित हुई है।

इससे कश्मीर के डेयरी किसानों की आय बढ़ेगी और क्षेत्र में श्वेत क्रांति (White Revolution) के नए युग की शुरुआत होगी। यह सफलता दर्शाती है कि कश्मीर अब राष्ट्रीय माल ढुलाई नेटवर्क से पूरी तरह जुड़ चुका है, जिससे आने वाले समय में अन्य पशुधन और कृषि उत्पादों का व्यापार आसान होगा।

यह पहल 'विकसित भारत' और आत्मनिर्भर जम्मू-कश्मीर की दिशा में एक बड़ा कदम है।?