अलीनगर में 12 मीटर सरकारी नाला ‘दफन’: चंदौली में क्या दोहराया जा रहा निलंबित एसडीएम वाला मॉडल?

चंदौली। प्रदेश की योगी सरकार भले ही भू-माफियाओं के खिलाफ ?जीरो टॉलरेंस? नीति का दावा कर रही हो लेकिन मुगलसराय तहसील के अलीनगर क्षेत्र में जमीनी हकीकत इस दावे को खुली चुनौती दे रही है। यहाँ करीब 12 मीटर चौड़ा सरकारी नाला मिट्टी से पाटकर अतिक्रमण किया गया है और महीनों से इस अतिक्रमण पर जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं।

नियमों के अनुसार सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण की सूचना देना और तत्काल रिपोर्ट दर्ज कराना लेखपाल की पहली जिम्मेदारी होती है लेकिन इस मामले में लेखपाल की चुप्पी अब सवालों के घेरे में है।

लेखपाल से तहसीलदार तक संदेह के घेरे में आरोप है कि लेखपाल ने न तो समय रहते रिपोर्ट दी न ही सीमांकन की प्रक्रिया शुरू कराई। डीडीयू नगर तहसीलदार के संज्ञान में मामला आने के बावजूद राजस्व संहिता-2006 के तहत बेदखली की कार्रवाई ठंडे बस्ते में पड़ी है। कार्रवाई में हो रही देरी यह संकेत देती है कि फाइल को जानबूझकर दबाया जा रहा है।

पुराने निलंबन से भी नहीं लिया गया सबक

गौरतलब है कि हाल ही में चंदौली के तीन पूर्व तहसीलदार?सतीश कुमार, लालता प्रसाद और विराग पांडेय?(वर्तमान में sdm) को सरकारी जमीन से जुड़े अनियमित मामलों में निलंबित किया गया है। उन पर अवैध कब्जाधारियों के पक्ष में आदेश देने के गंभीर आरोप लगे थे। अलीनगर का यह प्रकरण उसी प्रशासनिक ढर्रे की पुनरावृत्ति जैसा प्रतीत हो रहा है।

कानून और सुप्रीम कोर्ट के आदेश बेअसर

माननीय सुप्रीम कोर्ट स्पष्ट कर चुका है कि नाले, तालाब, पोखरे जैसे जलस्रोतों पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण अवैध है। इसके बावजूद नगर पालिका ने जलनिकासी अवरुद्ध होने पर कोई आपत्ति दर्ज नहीं की राजस्व विभाग ने अब तक अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू नहीं की और भू-माफिया सरकारी संपत्ति पर खुलेआम निजी मुनाफा कमा रहे हैं ।