12 मीटर चौड़ा सरकारी नाला विलुप्त के कगार पर, सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी, डीएम स्तर से जांच की मांग

चंदौली। मुगलसराय तहसील अंतर्गत अलीनगर क्षेत्र में राजस्व अभिलेखों में दर्ज लगभग 12 मीटर चौड़ा सरकारी नाला अतिक्रमण के कारण लगभग समाप्ति की कगार पर पहुंच चुका है। बीते वर्षों से नाले को पाटे जाने की प्रक्रिया चल रही है और अब उसी भूमि पर अवैध निर्माण की तैयारी की जा रही है। गंभीर तथ्य यह है कि पूरा मामला संबंधित राजस्व विभाग की जानकारी में होने के बावजूद लंबे समय तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता-2006 एवं भूमि संरक्षण नियमावली के तहत नाला, राजबहा, चकरोड और नहर जैसी सरकारी संपत्तियों की संरक्षा, सीमांकन, नियमित निरीक्षण और अतिक्रमण हटाने की प्राथमिक जिम्मेदारी लेखपाल एवं तहसील स्तरीय अधिकारियों पर निर्धारित है। नियमानुसार अतिक्रमण की सूचना मिलते ही लेखपाल द्वारा मौके की रिपोर्ट तैयार कर तहसीलदार के माध्यम से बेदखली की कार्रवाई की जानी चाहिए। इसके बावजूद नाले का अस्तित्व लगभग समाप्त हो जाना विभागीय कर्तव्यों की गंभीर अनदेखी की ओर संकेत करता है।

इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जलस्रोत, नाले, नहर और अन्य सार्वजनिक भूमि पर किया गया कोई भी अतिक्रमण अवैध है और इसे किसी भी स्थिति में नियमित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा है कि अतिक्रमण की जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई न करना संबंधित अधिकारियों की कर्तव्यहीनता मानी जाएगी जिस पर व्यक्तिगत जवाबदेही तय की जा सकती है।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि अलीनगर ही नहीं पूरे मुगलसराय क्षेत्र में कुछ प्लॉटर और कॉलोनाइजर कथित रूप से राजस्व अमले की मिलीभगत से नाले, माइनर, राजबहा, चकरोड और नहरों को पाटकर बिना स्वीकृत नक्शा और मानक के अवैध प्लॉटिंग कर रहे हैं। इससे आम नागरिक ठगी का शिकार हो रहे हैं और किसानों की फसलें जल निकासी बाधित होने से प्रभावित हो रही हैं।

सूत्रों के अनुसार डीडीयू नगर तहसीलदार ने इस प्रकरण में संबंधित लेखपाल से रिपोर्ट तलब की है। अब देखना यह होगा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और राजस्व नियमों के अनुरूप अतिक्रमण हटाने एवं जिम्मेदारी तय करने की दिशा में ठोस कार्रवाई कब तक की जाती है।