संघ शताब्दी वर्ष पर संडावता में विराट हिंदू सम्मेलन, 10 हजार से अधिक सनातनी हुए शामिल

संडावता। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में संडावता में विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में संडावता?झिरी मंडल के 10 गांवों से आए लगभग 10 हजार से अधिक सनातनी बंधुओं की सहभागिता रही। कार्यक्रम में धर्म, संस्कृति, संस्कार और राष्ट्र निर्माण के विषयों पर वक्ताओं ने ओजस्वी विचार रखे।मुख्य वक्ता साध्वी सरस्वती जी ने मातृ शक्ति से कुटुंब प्रबोधन का आह्वान करते हुए कहा कि बच्चों को मोबाइल की बुरी लत से दूर रखना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बच्चों को शस्त्र और शास्त्र दोनों का ज्ञान होना चाहिए तथा ऐसे संस्कार दिए जाएं कि वे छत्रपति शिवाजी महाराज, महाराणा प्रताप और झांसी की रानी लक्ष्मीबाई जैसे महापुरुषों से प्रेरणा लें। साध्वी जी ने पाश्चात्य संस्कृति के अंधानुकरण से बचते हुए भारतीय परंपरा और संस्कृति से जुड़े रहने का संदेश दिया।उन्होंने कहा कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के समय जिस प्रकार पूरे विश्व में हर्ष और उल्लास का वातावरण बना, वैसा ही वातावरण पुनः निर्मित करना होगा, ताकि देश में गौ माता के वध पर पूर्ण प्रतिबंध जैसे विषयों पर निर्णायक संकल्प लिया जा सके।अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के क्षेत्रीय संगठन मंत्री चेतस सुखाड़िया ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्षों की गौरवशाली यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि युवाओं को स्वामी विवेकानंद के पदचिन्हों पर चलने की आवश्यकता है। उन्होंने संघ द्वारा संचालित पंच परिवर्तन विषय पर विस्तार से जानकारी देते हुए स्वदेशी के उपयोग, नागरिक कर्तव्यों के पालन, जाति-पांति भेद समाप्त कर सामाजिक समरसता, संयुक्त परिवार की आवश्यकता और ?स्व? के बोध पर जोर दिया।उन्होंने कहा कि हिंदू समाज को संगठित होकर विश्व में हो रही हिंदुओं पर हिंसा की घटनाओं से सीख लेने की आवश्यकता है।कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, राजगढ़ विभाग के संघचालक उदयसिंह चौहान, साधु-संत, कथा प्रवक्ता एवं बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता मंचासीन रहे। सम्मेलन शांतिपूर्ण एवं अनुशासित वातावरण में संपन्न हुआ।