हिन्दी ने देश ही नहीं दुनिया को एकता के सूत्र में पिरोया: रमण 

डलमऊ,रायबरेली।निराला सृजन मंच एवं वी आर फाउंडेशन के संयुक्त तत्वाधान में हिन्दी दिवस के अवसर पर "राजभाषा हिन्दी: परम्परा एवं समृद्धि "विषयक संगोष्ठी का आयोजन शंकर नगर मुराई बाग में किया गया।
संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार रामनारायण रमन ने कहा कि हिंदी केवल हमारी मातृभाषा ही नहीं है बल्कि हिंदी ने देश और सारी दुनिया को एकता के सूत्र में पिरोया है।इसकी एक बेहद महत्वपूर्ण परंपरा रही है। कवि रमाकांत ने कहा कि आज तमाम भाषाएं हिन्दी की समृद्ध परम्परा में हैं और संपर्क भाषा के रूप में देश भर में फैली हुई हैं। कवि एवं आलोचक वाई.वेद प्रकाश ने कहा कि आज दुनिया के अनेक देशों में हिन्दी पर महत्वपूर्ण शोधकार्य हो रहा है जबकि भारत मे हिन्दी लेखक पहचान के संकट से गुजर रहे हैं।स्मृति मिश्रा ने कहा कि दुनिया के अनेक देशों में वहां के विश्वविद्यालय हिन्दी पढ़ा लिखा रहे हैं। अंजलि बाजपेई ने कहा कि भारत में हिन्दी पराई भाषा के रूप में स्थापित लगती है। और अंग्रेजी का बोलबाला है। सविता यादव ने कहा कि आज हम तथाकथित विकास में आगे बढ़ते जा रहे हैं और अपनी मातृभाषा हिन्दी पीछे छूटती जा रही है।ओमप्रकाश ने कहा कि भारत की अस्मिता की पहचान हिन्दी भाषा से होती है।डॉ जितेन्द्र मौर्या ने कहा कि हिन्दी के सम्मान की रक्षा के लिए कोई पहल नहीं करना चाहता। सम्राट ने वैश्विक स्तर पर हिन्दी की समृद्धि की समीक्षा प्रस्तुत किया।प्रदीप श्रीवास्तव ने कहा कि हिन्दी के विकास में सरकारें बहुत बड़ी बाधा उत्पन्न कर रही हैं।आर्यन यादव ने बताया कि हिन्दी के बजाय अंग्रेजी बोलने में भारतीय अपनी शान समझते हैं।पूनम सिंह पुष्पम ने कहा कि भूमण्डलीकरण के दौर में हिन्दी अपना स्थान खोती जा रही है।इस अवसर पर सत्य प्रकाश, विनोद कुमार, अमित कुमार यादव, खुशबू सिंह,आन्या प्रिया, एंजेलिना प्रिया,वेद प्रकाश, रुचि सेठ,अनुपम यादव, रिया वर्मा,संचिता, सुंदर लाल मनमौजी,सत्य प्रकाश त्रिवेदी, बसंत लाल गुप्ता,अशेष बाजपेई आदि ने उपस्थित रहकर हिन्दी की दशा और दिशा पर चिंता व्यक्त की। संगोष्ठी का संचालन संजय सिंह ने किया।