सपहईया में ‘हरियाली कत्लेआम’! वन विभाग की चौखट के नीचे कट गए चार आम के हरे पेड़

सपहईया में ?हरियाली कत्लेआम?! वन विभाग की चौखट के नीचे कट गए चार आम के हरे पेड़

 

आरा चलता रहा या जिम्मेदारों की आंखों पर पट्टी बंधी थी? शादाब और कथित प्राइवेट वनकर्मी सोनू की भूमिका पर गंभीर सवाल

 

#हरदोई/काशिमपुर

 

सपहईया गांव में चार हरे आम के पेड़ों की कथित कटान ने वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर ही सवालिया निशान लगा दिया है। आरोप है कि लकड़कट्टा शादाब और कथित प्राइवेट वनकर्मी भूपेंद्र सिंह उर्फ सोनू की भूमिका से पेड़ों की कटान कराई गई।

सवाल सीधा है_यदि पेड़ अवैध रूप से काटे गए तो वन विभाग को भनक क्यों नहीं लगी? क्या विभाग की निगरानी व्यवस्था इतनी कमजोर है कि लकड़कट्टे दिनदहाड़े हरे पेड़ों पर आरा चला दें और जिम्मेदारों को खबर तक न हो?

ग्रामीणों का आरोप है कि संरक्षण के दायरे में आने वाले आम के हरे पेड़ों को कथित तौर पर काट दिया गया। ऐसे में अब सिर्फ पेड़ों की कटान का मामला नहीं, बल्कि कटान की अनुमति, लकड़ी ले जाने की प्रक्रिया और संबंधित लोगों की भूमिका भी जांच का विषय बन गई है।

कथित प्राइवेट वनकर्मी पर भी उठी उंगली

भूपेंद्र सिंह उर्फ सोनू को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि वह वन विभाग से संबद्ध किसी निजी व्यवस्था में कार्यरत हैं तो उनकी नियुक्ति किस आधार पर हुई? उनके अधिकार क्या हैं? और पेड़ों की कटान के दौरान उनकी भूमिका क्या थी?

कहीं ऐसा तो नहीं कि वन सुरक्षा के नाम पर जिम्मेदारी किसी और की थी और फायदा किसी और का? इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा।

अब देखना यह है_आरा पकड़ा जाएगा या मामला दबा दिया जाएगा?

सपईया में चार आम के पेड़ों की कथित कटान के बाद वन विभाग के सामने अग्निपरीक्षा है। विभाग मौके पर पहुंचकर जांच करता है या फिर हमेशा की तरह पेड़ कटने के बाद कागजों पर हरियाली बचाने की कवायद शुरू होती है_इस पर ग्रामीणों की नजर है।

यदि कटान बिना वैध अनुमति हुई है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई होनी चाहिए। क्योंकि सवाल सिर्फ चार पेड़ों का नहीं, वन संपदा की सुरक्षा और विभागीय निगरानी की विश्वसनीयता का है।

 

#YogiAdityanath