सत्ता के कथित रसूखदारों के संरक्षण में गरीब का आशियाना फूंकने का आरोप!

सत्ता के कथित रसूखदारों के संरक्षण में गरीब का आशियाना फूंकने का आरोप!

छह बेजुबान पशुओं की जान पर बनी आफत, पीड़िता की तहरीर के 12 घंटे बाद भी कार्रवाई का इंतजार!

#हरदोई

बिलग्राम कोतवाली क्षेत्र में दबंगई और कथित राजनीतिक संरक्षण का ऐसा मामला सामने आया है, जिसने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्राम दूधेला निवासी पीड़िता नीलम ने आरोप लगाया है कि गांव के कुछ लोगों ने आपसी साजिश रचकर आधी रात को उसके बंगले में आग लगा दी। गनीमत रही कि समय रहते आग की जानकारी हो गई और बंगले में बंधे छह बेजुबान पशुओं को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

 

पीड़िता नीलम के मुताबिक, 03 नवंबर 2026 की रात करीब दो बजे पप्पू पुत्र यदुनंदन निवासी ढाभा, अंकित निवासी राधानगर, राजू पुत्र नन्हे तथा रामसच्चे पुत्र राजाराम निवासी दूधेला सहित अन्य लोगों पर आर्थिक एवं पशु हानि पहुंचाने की नीयत से आग लगाने का आरोप है। पीड़िता का कहना है कि घटना से पहले आरोपितों ने गांव के बाहर मंदिर पर बैठकर आपस में सलाह-मशविरा भी किया था।

आधी रात को आगजनी, डायल 112 पर सूचना, फिर भी कार्रवाई का इंतजार!

पीड़िता के अनुसार, बंगले में तीन भैंस, दो गाय और एक बछड़ा बंधा हुआ था। आग की जानकारी मिलते ही उसने आनन-फानन में सभी पशुओं को सुरक्षित बाहर निकाला और तत्काल डायल 112 पर सूचना दी। इसके बाद 04 नवंबर को बिलग्राम कोतवाली में लिखित तहरीर देकर शिकायत की गई।

सबसे बड़ा सवाल_आखिर कानून का इकबाल कहां है?

पीड़िता का आरोप है कि शिकायत के बावजूद करीब 12 घंटे बीतने पर भी आरोपितों के विरुद्ध कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। इतना ही नहीं, आरोप है कि शिकायत के बाद भी उसे गाली-गलौज और खुलेआम धमकियां दी जा रही हैं।

अब सवाल यह है कि क्या गरीब और कमजोर की फरियाद सुनने के लिए भी किसी बड़े रसूख की जरूरत है? क्या किसी का आशियाना जलाने और बेजुबान पशुओं की जान खतरे में डालने के आरोपों को महज एक तहरीर तक सीमित रखा जाएगा?

पत्रकारिता का सवाल साफ है_आखिर गरीब को न्याय कब मिलेगा?

रिपोर्ट: डी.डी. शुक्ला, स्वतंत्र पत्रकार

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