राजस्व अभिलेख शाखा में नकल के लिए ग्रामीण परेशान, कार्यप्रणाली पर उठे सवाल,मिसल नकल के लिए महीनों चक्कर लगाने का आरोप, समय-सीमा में दस्तावेज नहीं मिलने से ग्रामीण त्रस्त।

बैकुंठपुर। जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट परिसर में संचालित राजस्व अभिलेख शाखा में मिसल नकल एवं अन्य राजस्व अभिलेखों की प्रमाणित प्रतिलिपि प्राप्त करने के लिए ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आवेदकों का आरोप है कि निर्धारित समय-सीमा में दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं, जिसके कारण दूर-दराज से आने वाले ग्रामीणों को बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। सूत्र कुछ आवेदकों ने राजस्व अभिलेख शाखा की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि सामान्य आवेदकों के कार्य में देरी होती है, जबकि प्रभावशाली लोगों एवं कथित रूप से भू-माफियाओं से जुड़े आवेदनों को प्राथमिकता दिए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इतना ही नहीं, कुछ लोगों द्वारा नकल दस्तावेज जल्द उपलब्ध कराने के लिए कथित तौर पर 500 से 1000 रुपये तक की राशि लिए जाने की भी बात कही जा रही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और इसकी वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है।एक ग्रामीण ने बताया कि उसने 3 अगस्त 2026 को नकल प्राप्त करने के लिए आवेदन किया था। उसे 14 अगस्त 2026 तक सत्यापित प्रतिलिपि उपलब्ध कराए जाने की जानकारी दी गई थी। निर्धारित अवधि बीतने के बाद जब वह कई बार नकल शाखा पहुंचा तो कभी मशीन खराब होने तो कभी संबंधित कर्मचारी के कार्यालय में नहीं होने की बात कहकर उसे अगले दिन आने के लिए कहा गया। ग्रामीण का कहना है कि लगातार कार्यालय के चक्कर लगाने के बावजूद उसे अब तक दस्तावेज प्राप्त करने में परेशानी हो रही है।

जांच से सामने आ सकता है सच

राजस्व अभिलेख जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों के लिए यदि आवेदकों को अनावश्यक रूप से लंबे समय तक इंतजार करना पड़ रहा है, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। वहीं, यदि किसी प्रकार के लेन-देन या प्रभावशाली लोगों को अनुचित प्राथमिकता देने की शिकायतें सही पाई जाती हैं, तो यह और भी गंभीर मामला हो सकता है।ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि राजस्व अभिलेख शाखा में लंबित आवेदनों की स्थिति, निर्धारित समय-सीमा में किए गए कार्यों तथा नकल वितरण की प्रक्रिया की जांच कराई जाए। साथ ही, यदि जांच में अनियमितता अथवा किसी प्रकार के लेन-देन की पुष्टि होती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए। फिलहाल लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।