यातायात के नियम तो मौजूद हैं, परंतु अनुपस्थित है धैर्य!

यातायात के नियम तो मौजूद हैं, परंतु अनुपस्थित है धैर्य!

नियमों की अनदेखी,जल्दबाजी की होड़ और अनुशासनहीनता से बिगड़ रही हरदोई की यातायात व्यवस्था

#रिपोर्ट_ #डी_डी_शुक्ला 

#Hardoi 

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यातायात के नियम किताबों में मौजूद हैं, चौराहों पर ट्रैफिक पुलिस भी तैनात है, लेकिन अगर कुछ नदारद है, तो वह है धैर्य, अनुशासन और नियमों के प्रति सम्मान। हरदोई की यातायात व्यवस्था को लेकर असंतोष अब महज चर्चा का विषय नहीं, बल्कि लोगों के रोजमर्रा के अनुभव का हिस्सा बनता जा रहा है।

चौराहों पर खड़ी यातायात पुलिस का रुकने का संकेत कुछ वाहन चालकों को मानो तेजी से निकल जाने की चुनौती नजर आता है। दोपहिया वाहनों पर तीन सवारियां, बिना हेलमेट फर्राटा भरते चालक, गलत दिशा से वाहनों की आवाजाही और यातायात नियमों की खुलेआम अनदेखी_ये दृश्य अब अपवाद नहीं, बल्कि सड़कों की आम तस्वीर बनते जा रहे हैं। सवाल यह है कि आखिर नियमों के बावजूद सड़क पर अनुशासन क्यों दिखाई नहीं देता?

समस्या केवल नियम तोड़ने तक सीमित नहीं है। इसके पीछे छिपी मानसिकता कहीं अधिक गंभीर है। हर किसी को सबसे पहले निकलने की जल्दी है। दूसरे को रास्ता देने में मानो प्रतिष्ठा कम होने का डर है। कुछ सेकंड बचाने की चाह में लोग गलत दिशा में वाहन घुसा देते हैं, अपनी लेन छोड़ देते हैं और दूसरों की सुविधा व सुरक्षा को नजरअंदाज कर देते हैं।

नतीजा यह होता है कि कुछ ही पलों में सामान्य रूप से चलने वाला रास्ता जाम में तब्दील हो जाता है। विडंबना देखिए_जो जल्दबाजी कुछ मिनट बचाने के लिए की जाती है, वही कभी-कभी आधे घंटे या उससे भी अधिक समय बर्बाद कर देती है।

यातायात जाम का कारण केवल सड़कों की कमी या वाहनों की बढ़ती संख्या नहीं, बल्कि नागरिक अनुशासन की कमी भी है। जब तक वाहन चालक अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेंगे, तब तक केवल पुलिस की मौजूदगी से व्यवस्था में स्थायी सुधार संभव नहीं होगा।

जरूरत इस बात की है कि यातायात पुलिस नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई करे, चौराहों पर व्यवस्था को प्रभावी बनाए और गलत दिशा में वाहन चलाने, बिना हेलमेट यात्रा करने तथा क्षमता से अधिक सवारियां बैठाने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करे। साथ ही, आम नागरिकों को भी यह समझना होगा कि सड़क किसी एक व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि सबकी साझा जिम्मेदारी है।

याद रखिए, सड़क पर कुछ सेकंड की जल्दबाजी आपकी ही नहीं, किसी दूसरे की जिंदगी पर भी भारी पड़ सकती है।

आखिर कब समझेंगे हम कि सड़क पर आगे निकलना ही समझदारी नहीं है, सुरक्षित घर पहुंचना ही असली जीत है?

नियमों से व्यवस्था बनती है, लेकिन धैर्य और अनुशासन से व्यवस्था चलती है।

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