धनुष यज्ञ और राम विवाह प्रसंग ने मोहा मन, परशुराम-लक्ष्मण संवाद पर खूब बजीं तालियां

आलापुर (अंबेडकरनगर)। आस्था के रंग, भक्ति की उमंग और सामाजिक एकता की अनूठी मिसाल। कोहड़ा बृजभानपुर इमिलिया में आयोजित रामलीला के तीसरे दिन धनुष यज्ञ एवं राम विवाह प्रसंग का ऐसा भावपूर्ण मंचन हुआ कि दर्शक भावविभोर हो उठे। भगवान श्रीराम के जयकारों से रामलीला परिसर गूंज उठा। खास बात यह रही कि मंच पर हिंदू-मुस्लिम एकता की खूबसूरत तस्वीर देखने को मिली, जहां मुस्लिम युवक जाने आलम ने राजा जनक की भूमिका निभाकर दर्शकों का दिल जीत लिया।

रामलीला कमेटी कोहड़ा बृजभानपुर इमिलिया की ओर से आयोजित इस धार्मिक आयोजन में गांव के कलाकारों ने अपने अभिनय से पौराणिक प्रसंगों को जीवंत कर दिया। रामलीला देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटे। राजा जनक के रूप में जाने आलम के अभिनय को दर्शकों ने खूब सराहा। उनके सशक्त अभिनय ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मंच पर उनकी प्रस्तुति ने सामाजिक सौहार्द और आपसी भाईचारे का संदेश भी दिया।

परशुराम-लक्ष्मण संवाद ने बांधा समां

धनुष यज्ञ के दौरान भगवान परशुराम और लक्ष्मण के बीच तीखी नोकझोंक ने दर्शकों को खूब रोमांचित किया। दोनों पात्रों के संवाद और अभिनय पर दर्शकों ने जमकर तालियां बजाईं। वहीं, गांव के कलाकार संग्राम शर्मा ने रावण की भूमिका में अपने अभिनय से मंच पर जीवंतता भर दी। बाणासुर और रावण के बीच संवाद भी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहा।

धनुष यज्ञ के बाद सीता स्वयंवर और श्रीराम-सीता विवाह का मंचन होते ही पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। दर्शक जय श्रीराम और सीताराम के जयकारे लगाने लगे। पूरे आयोजन में श्रद्धा, उत्साह और सांस्कृतिक परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला।

रामलीला सिखाती है आदर्श जीवन जीने की कला

रामलीला समिति के अध्यक्ष शिव कुमार शर्मा ने कहा कि रामलीला केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह समाज को आदर्श जीवन जीने की कला सिखाती है। भगवान श्रीराम का जीवन मर्यादा, त्याग, कर्तव्य और नैतिकता की प्रेरणा देता है। ऐसे आयोजन समाज में आपसी भाईचारे, प्रेम और सौहार्द को मजबूत करते हैं।

कोहड़ा बृजभानपुर इमिलिया की रामलीला ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि धार्मिक और सांस्कृतिक मंच समाज को जोड़ने का सशक्त माध्यम बन सकते हैं। कलाकारों की मेहनत और ग्रामीणों की सहभागिता से आयोजन क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।