डलमऊ एवं ऊंचाहार क्षेत्र में गंगा नदी में गिर रहे नालों की स्थिति का लिया जायजा, संबंधित अधिकारियों के साथ की विस्तृत समीक्षा बैठक

गंगा में गिर रहे नालों का राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के निदेशक ने किया स्थलीय निरीक्षण

रायबरेली।जनपद में गंगा नदी को प्रदूषणमुक्त एवं स्वच्छ बनाए रखने के उद्देश्य से राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन, जल शक्ति मंत्रालय,भारत सरकार के निदेशक श्री रावल हमेंद्र कुमार (आईएएस) द्वारा प्रभागीय निदेशक प्रखर मिश्र की उपस्थिति में गंगा नदी में गिर रहे नालों कल्यानी खरौली एनटीपीसी परिसर से निकल रहे नालों का स्थलीय निरीक्षण किया गया। इस दौरान उन्होंने डलमऊ एवं ऊंचाहार क्षेत्र में गंगा नदी में गिर रहे नालों की स्थिति का जायजा लिया तथा उनके माध्यम से नदी में पहुंचने वाले दूषित जल के प्रबंधन एवं उपचार की व्यवस्थाओं का अवलोकन किया गया।निरीक्षण से पूर्व संबंधित अधिकारियों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रभागीय निदेशक प्रखर मिश्र, एनटीपीसी की महाप्रबंधक प्रीति सिन्हा, जिला परियोजना अधिकारी संजय कुमार, क्षेत्रीय वन अधिकारी रवि शंकर, अधिशासी अभियंता, जल निगम (ग्रामीण), लखनऊ तथा अधिशासी अधिकारी, नगर पंचायत डलमऊ उ प्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के कर्मचारी सामाजिक सेवक जितेन्द्र द्विवेदी उपस्थित रहे। बैठक के दौरान जनपद में गंगा नदी में गिरने वाले नालों की वर्तमान स्थिति, उनके जल शोधन की व्यवस्था तथा नालों से नदी में पहुंचने वाले प्रदूषण को रोकने के संबंध में विस्तार से चर्चा की गई।बैठक के उपरांत निदेशक श्री रावल हमेंद्र कुमार ने अधिकारियों के साथ डलमऊ क्षेत्र के गंगा नदी में गिर रहे सभी नालों का स्थलीय भ्रमण किया। इसके साथ ही ऊंचाहार क्षेत्र में गंगा नदी में गिरने वाले नालों का भी निरीक्षण किया गया। उन्होंने मौके पर नालों की स्थिति एवं जल शोधन से संबंधित व्यवस्थाओं का अवलोकन करते हुए संबंधित अधिकारियों से आवश्यक जानकारी प्राप्त की।निदेशक, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) द्वारा निर्देशित किया गया कि जनपद में गंगा नदी में सीधे प्रवाहित होने वाले समस्त नालों एवं नालियों के जल की गुणवत्ता का उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के माध्यम से प्रतिमाह अनिवार्य रूप से परीक्षण कराया जाए। परीक्षण के दौरान यदि किसी नाले के जल में निर्धारित मानकों से अधिक प्रदूषण अथवा अनुपचारित (Untreated) जल का प्रवाह पाया जाता है, तो संबंधित विभागीय अधिकारियों एवं उत्तरदायी कार्यदायी संस्थाओं की जवाबदेही निर्धारित करते हुए उनके विरुद्ध नियमानुसार कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।साथ ही, प्रदूषण के स्रोतों की तत्काल पहचान कर जल को निर्धारित मानकों के अनुरूप उपचारित किए जाने हेतु प्रभावी कार्यवाही की जाए। परीक्षण रिपोर्ट प्रत्येक माह जिला गंगा समिति के समक्ष प्रस्तुत की जाए तथा लापरवाही अथवा निर्देशों की अवहेलना की स्थिति में संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध उत्तरदायित्व निर्धारित कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य गंगा नदी में गिरने वाले दूषित जल के प्रभावी प्रबंधन, नालों के जल का समुचित शोधन सुनिश्चित करने तथा गंगा नदी की स्वच्छता एवं निर्मलता बनाए रखने के लिए संचालित व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन करना रहा।