घायल 6 फीट के स्पेक्टेकल्ड कोबरा का रेस्क्यू,

चित्तौड़गढ़ में घायल 6 फीट के स्पेक्टेकल्ड कोबरा का रेस्क्यू, वन्यजीव प्रेमी और डॉक्टरों ने उपचार में निभाई अहम भूमिका

वन विभाग, चित्तौड़गढ़ वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण समिति और डॉ. धर्मेंद्र सोन की टीम का संयुक्त प्रयास; वेटेनरी विद्यार्थियों को भी दी गई वन्यजीव संरक्षण की जानकारी

चित्तौड़गढ़, राजस्थान। वन्यजीव संरक्षण और जनजागरूकता की दिशा में चित्तौड़गढ़ में एक और सराहनीय प्रयास सामने आया है। लगभग 6 फीट लंबा इंडियन स्पेक्टेकल्ड कोबरा (Indian Spectacled Cobra) दुर्घटना में घायल हो गया था। हादसे में उसके मुँह पर गंभीर चोट आई, जिसके बाद वन विभाग और चित्तौड़गढ़ वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण समिति की टीम ने मिलकर उसे उपचार के लिए पशु चिकित्सक डॉ. धर्मेंद्र सोन के पास पहुँचाया।

डॉ. धर्मेंद्र सोन और उनकी टीम ने घायल साँप की जाँच एवं उपचार किया। इस दौरान वन्यजीव के सुरक्षित रेस्क्यू और उचित चिकित्सा सहायता के महत्व पर भी जोर दिया गया।

मुबारिक खान और पीयूष कांबले की अहम भूमिका

चित्तौड़गढ़ वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण समिति के अध्यक्ष मनीष तिवारी ने बताया कि इस पूरे प्रयास में टीम के सदस्य पीयूष कांबले और मुबारिक खान ने वन्यजीव संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई। वहीं, पीयूष कांबले ने उपचार के दौरान पशु चिकित्सालय में इंटर्नशिप कर रहे विद्यार्थियों को साँप की पहचान, उसके व्यवहार, सुरक्षा सावधानियों और वन्यजीव संरक्षण के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी।

इस पहल का उद्देश्य केवल घायल वन्यजीव की मदद करना ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों और समाज में साँपों के प्रति वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना भी रहा।

रेस्क्यू के साथ जागरूकता का संदेश

यह घटना दर्शाती है कि वन विभाग, प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम और पशु चिकित्सा विशेषज्ञों के बीच समन्वय वन्यजीव संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। साँप पारिस्थितिकी तंत्र का अहम हिस्सा हैं और उनके संरक्षण के लिए जनजागरूकता आवश्यक है।

चित्तौड़गढ़ वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण समिति का संदेश
मनीष तिवारी ने बताया कि साँपों को देखकर घबराएँ नहीं, उन्हें नुकसान न पहुँचाएँ और स्वयं पकड़ने का प्रयास न करें। किसी साँप के घायल होने या आबादी वाले क्षेत्र में दिखाई देने पर वन विभाग अथवा प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम से संपर्क करें।