एफसीएम लगा तो हीमोग्लोबिन पहुंचा छह से 12

मार्च से अब तक 800 गर्भवती महिलाओं को एफसीएम इंजेक्शन की सुविधा

आयरन की गोलियां नहीं आईं रास, एफसीएम से मिला लाभ
रायबरेली।गर्भावस्था के आठवें महीने में हीमोग्लोबिन छह ग्राम प्रति डेसीलीटर पहुंचने के बाद कुसुमा देवी(बदला हुआ नाम)को लगातार कमजोरी, थकान और हाथ-पैरों में झुनझुनी की शिकायत रहती थी।आयरन की गोलियां अनुकूल न लगने के कारण वह उनका नियमित सेवन भी नहीं कर पा रही थीं।ऐसे में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सकों की सलाह से उन्हें एफसीएम(फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज)इंजेक्शन लगाया गया।करीब एक माह बाद हुई जांच में उनका हीमोग्लोबिन बढ़कर 12 ग्राम प्रति डेसीलीटर हो गया।इसके बाद पांच सितंबर को उनका सामान्य प्रसव हुआ और उन्होंने 2.8 किलोग्राम वजन के स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया।कुसुमा देवी का यह मामला रायबरेली में एनीमिया से पीड़ित गर्भवती महिलाओं के प्रबंधन के लिए शुरू की गई एफसीएम सुविधा के परिणामों का एक उदाहरण है।जनपद में मार्च 2026 से गंभीर एनीमिया से पीड़ित गर्भवती महिलाओं के लिए एफसीएम इंजेक्शन की सुविधा शुरू की गई है।अब तक 800 गर्भवती महिलाओं को इसका लाभ मिल चुका है।इंजेक्शन लगने के करीब एक माह बाद कराई गई।हीमोग्लोबिन जांच में महिलाओं के हीमोग्लोबिन स्तर में सुधार दर्ज किया गया।
जिला स्वास्थ्य शिक्षा एवं सूचना अधिकारी डी.एस.अस्थाना के अनुसार,एफसीएम इंजेक्शन प्राप्त करने वाली सभी 800 गर्भवती महिलाओं की एक माह बाद दोबारा हीमोग्लोबिन जांच कराई गई।इन गर्भवती महिलाओं में इंजेक्शन से पहले हीमोग्लोबिन का औसत स्तर 7.8 ग्राम प्रति डेसीलीटर था, जो उपचार के बाद बढ़कर लगभग 10 ग्राम प्रति डेसीलीटर हो गया।अब तक एफसीएम लगाए जाने के बाद किसी भी तरह के प्रतिकूल प्रभाव का कोई मामला सामने नहीं आया है।रोहनिया क्षेत्र के छिपिया गांव निवासी कुसुमा देवी को गर्भावस्था के दौरान पहले से आयरन-फोलिक एसिड और कैल्शियम की दवाएं दी जा रही थीं।उन्हें आयरन युक्त एवं पौष्टिक आहार लेने की सलाह भी दी गई थी।गांव की आशा कार्यकर्ता नीलम देवी बताती हैं कि 24 जुलाई को गर्भावस्था के आठवें महीने में जांच के दौरान कुसुमा देवी का हीमोग्लोबिन छह ग्राम प्रति डेसीलीटर पाया गया।उन्हें पेट में दर्द,कमजोरी,थकान,हाथ-पैरों में झुनझुनी और सूजन की शिकायत भी थी।स्थिति को देखते हुए उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया,जहां चिकित्सकों की सलाह पर उन्हें एफसीएम इंजेक्शन लगाया गया।नीलम देवी के अनुसार, इंजेक्शन लगाने के बाद कुसुमा देवी को किसी तरह की परेशानी या प्रतिकूल प्रभाव नहीं हुआ।करीब एक माह बाद हुई जांच में उनके हीमोग्लोबिन में सुधार पाया गया। स्वास्थ्य में सुधार के बाद पांच सितंबर को उनका सामान्य प्रसव हुआ।प्रभारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.मनोज कुमार शुक्ला ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान एनीमिया मां और गर्भस्थ शिशु,दोनों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती हो सकता है।इसलिए गर्भवती महिलाओं में समय पर एनीमिया की पहचान, नियमित हीमोग्लोबिन जांच और आवश्यकता के अनुसार उपचार बेहद जरूरी है।उन्होंने कहा कि गंभीर एनीमिया से पीड़ित और जरूरतमंद गर्भवती महिलाओं के लिए एफसीएम इंजेक्शन की सुविधा शुरू की गई है।उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग का प्रयास है कि गर्भवती महिलाओं की समय पर जांच कर एनीमिया की पहचान की जाए और उन्हें आवश्यकता के अनुसार उपचार उपलब्ध कराया जाए,ताकि प्रसव के दौरान होने वाली जटिलताओं को कम किया जा सके और मां एवं नवजात, दोनों का स्वास्थ्य सुरक्षित रहे।