अवैध कटान पर कलम चलाई तो पत्रकार पर मुकदमा! कासिमपुर पुलिस की कार्रवाई ने खड़े किए तीखे सवाल

अवैध कटान पर कलम चलाई तो पत्रकार पर मुकदमा! कासिमपुर पुलिस की कार्रवाई ने खड़े किए तीखे सवाल

पेड़ों की कटाई पर उठाई आवाज, अब पत्रकार मेराज अली के खिलाफ दर्ज हुआ उधार के पैसे न देने का मुकदमा; पत्रकार ने जताई साजिश की आशंका, निष्पक्ष जांच की मांग तेज

#हरदोई

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गौसगंज चौकी क्षेत्र में सरकारी सड़क किनारे खड़े पेड़ों के कथित अवैध कटान का मामला अब नया मोड़ लेता नजर आ रहा है। पेड़ों की कटाई और लकड़ी की बिक्री को लेकर लगातार खबरें प्रकाशित करने तथा सोशल मीडिया पर आवाज उठाने वाले पत्रकार मेराज अली के खिलाफ कासिमपुर पुलिस द्वारा मुकदमा दर्ज किए जाने से पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।

मामला महज एक मुकदमे तक सीमित नहीं है, बल्कि सवाल उस पूरे घटनाक्रम पर है, जिसमें अवैध कटान का मुद्दा उठाने वाले पत्रकार के खिलाफ उधार के पैसे न देने के आरोप में कार्रवाई हुई है। पत्रकार का आरोप है कि उनके खिलाफ यह मुकदमा अवैध कटान के मामले को लगातार उजागर करने के चलते साजिशन दर्ज कराया गया है। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

सरकारी पेड़ों की कटाई पर जिम्मेदारों से सवाल कब?

गौसगंज चौकी क्षेत्र में सरकारी सड़क किनारे खड़े पेड़ों के कथित कटान और लकड़ी की बिक्री को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पत्रकार मेराज अली इस मुद्दे पर समाचार प्रकाशित करने के साथ सोशल मीडिया के माध्यम से भी संबंधित अधिकारियों का ध्यान आकर्षित कर रहे थे। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि यदि सरकारी संपत्ति से जुड़े पेड़ों का अवैध कटान हुआ है, तो अब तक जिम्मेदारों के विरुद्ध क्या कार्रवाई हुई? क्या वन विभाग ने जांच की और क्या संबंधित अधिकारियों ने मौके की वास्तविक स्थिति का सत्यापन कराया?

पत्रकार पर मुकदमा, लेकिन अवैध कटान की जांच का क्या?

पत्रकार के खिलाफ मुकदमा दर्ज होना अपने आप में किसी साजिश का प्रमाण नहीं है। लेकिन पत्रकार द्वारा लगाए गए आरोपों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पूरे मामले में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि मुकदमे के पीछे वास्तविक विवाद क्या है और क्या इसका अवैध कटान की खबरों से कोई संबंध है। इन सवालों का जवाब निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकता है।

अब जवाबदेही से बचना आसान नहीं!

इस पूरे प्रकरण में कासिमपुर पुलिस और वन विभाग की भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों का तथ्यात्मक जवाब सामने आना चाहिए। यदि पेड़ों का अवैध कटान हुआ है, तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो। यदि पत्रकार के खिलाफ दर्ज मुकदमे में आरोप सही हैं, तो कानून अपना काम करे। लेकिन यदि किसी भी पक्ष की ओर से कानून का दुरुपयोग हुआ है, तो उसकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

अब बड़ा सवाल यही है_सरकारी पेड़ों के कथित अवैध कटान की जांच कब होगी और पत्रकार द्वारा लगाए गए साजिश के आरोपों की निष्पक्ष पड़ताल कौन करेगा? पुलिस का आधिकारिक पक्ष, मुकदमे में दर्ज आरोपों का विवरण और वन विभाग की कार्रवाई सामने आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

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