अतिरिक्त जिला न्यायाधीश ने रक्तदान कर बचाई जिंदगी

चित्तौड़गढ़ रक्तदान ही ईश्वर की सच्ची सेवा है।� यह कहना थाअतिरिक्त जिला न्यायाधीश रक्तदान ही एक ऐसा विकल्प है जिससे किसी अन्य का जीवन बचाया जा सकता है बुधवार को जिले के निजी अस्पताल में भर्ती सांगरिया निवासी 1 वर्ष के मासूम बच्चे के गर्म दूध से जल जाने के कारण पिछले 5 दिनों से उपचार चल रहा था बच्चे की हालत नाजुक होने से डॉक्टर ने बताया कि बच्चे को बी पॉजिटिव खून की आवश्यकता है परिजनों द्वारा खुद प्रयास किये गए परन्तु परिवार से बी पॉजिटिव ब्लड ग्रुप किसी का मेच नही हुआ परिजनों ने सोशल मीडिया के माध्यम से जिले में लंबे समय से रक्तदान के क्षेत्र में सेवाएं दे रही टीम जीवनदाता से सम्पर्क किया और रक्त आवश्यकता की मांग की।
�संस्था द्वारा बच्चे की मदद हेतु रक्त व्यवस्था के लिए कॉल द्वारा अतिरिक्त जिला न्यायाधीश अमित दवे से मदद हेतु अनुरोध किया अमित दवे काफी समय से रक्तदान की इच्छा जाहिर कर रहे थे तो तुरन्त मासूम बच्चे की जान बचाने के लिए 20 मिनट में जिला ब्लड बैंक पहुंच गए�
जहां रक्तदान कर मासूम को जीवनदान दिया गया और�
अतिरिक्त जिला न्यायाधीश ने युवाओं के लिए सन्देश दिया कि ब्लड बैंक में चल रही रक्त की कमी को देखते हुए हर शहरवासी,ग्रामवासी को रक्तदान जैसे पुनीत कार्य के लिए आगे आना चाहिए। रक्तदान करना हमारा नैतिक कर्तव्य बनता है।हर स्वस्थ व्यक्ति को 3 माह में स्वेच्छिक रक्तदान करना चाहिए ताकि किसी जरूरतमंद को रक्त के लिए भटकना नही पड़े।
वही बीती रात 1 बजे कंवरपुरा निवासी गर्भवती महिला लीला बाई को प्रसव के दौरान अचानक ब्लीडिंग हो गयी चिकित्सकों ने गर्भवती की जान बचाने के लिए दुर्लभ ग्रुप ओ नेगेटिव रक्त की मांग की
देर रात ओ नेगेटिव ब्लड ग्रुप अरेंज करना परिवारजनों के लिए चुनौती बन गया था।
परिजनों ने काफी प्रयास किये लेकिन ब्लड बैंक में "ओ नेगेटिव" ब्लड ग्रुप उपलब्ध नही होने से ब्लड अरेंज करने में काफी समस्या आ रही थी अंत मे परिजनों ने टीम जीवनदाता से सोशल मीडिया द्वारा सम्पर्क कर आपबीती बताई तो तुरन्त संस्था द्वारा रात 2 बजे कैलाशनगर निवासी बनवारी सोनी को कॉल कर मदद के लिए बताया तो तुरन्त देर रात 2 बजे जिला ब्लड बैंक पहुंच रक्तदान कर गर्भवती की जान बचाकर इंसानियत की अनूठी मिसाल पेश की।
बनवारी सोनी सन 1987 से लगातार जब भी किसी जरूरतमंद को खून की जरूरत होती है तो �रक्तदान करने ब्लड बैंक पहुंच जाते है सोनी अब तक कई मरीजों को अपने खून से जिंदगी दे चुके है
कोरोना महामारी के काल में बनवारी सोनी अपने दोनों पुत्रों उत्तम सोनी,महावीर सोनी समेत आपातकालीन स्तिथियों में दो-दो बार रक्तदान कर चुके है।

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