Varanasi News:केंद्र में एक, राज्य में पूर्वांचल से 8 मंत्री फिर भी एमएलसी चुनाव में भाजपा की हार, सपा की जीत का अंतर भी बढ़ा 2020 में निर्दलीय रहे प्रमोद मिश्रा इस बार भाजपा के प्रत्याशी, पिछली बार से भी कम

 

लाल बिहारी यादव ने बचाई शिक्षक एमएलसी की सीट, 2020 के मुकाबले 3846 अधिक मत हासिल किए

संवाददाता कार्तिकेय पाण्डेय 

वाराणसी। पूर्वांचल में राज्य और केंद्र के नौ मंत्री होने के बाद भी शिक्षक एमएलसी के चुनाव में भाजपा की करारी हार हुई है। अकेले वाराणसी से ही चार मंत्री हैं। इसके बावजूद भाजपा प्रत्याशी को निर्दलीय के तौर पर जितने मत पिछले चुनाव में मिले थे, उससे भी कम मत इस बार मिले हैं। इससे मंत्रियों, विधायक और संगठन के पदाधिकारियों के कामकाज पर सवाल खड़े हो गए हैं।

वर्ष 2020 में लाल बिहारी यादव को 7,766 मत मिले थे। उस चुनाव में डॉ. प्रमोद मिश्रा निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में थे और उन्हें 6,830 मत मिले थे। इस बार भाजपा ने प्रमोद मिश्रा को अपना प्रत्याशी बनाया, लेकिन अंतिम परिणाम में उन्हें 6,597 मत ही मिले। पिछले चुनाव की तुलना में उनके मत 233 कम रहे। दूसरी ओर, लाल बिहारी यादव के अंतिम मत बढ़कर 11,612 हो गए। यानी 2020 के मुकाबले उन्हें 3,846 अधिक मत मिले।
शिक्षक और स्नातक चुनाव परिणाम एमएलसी भी महत्वपूर्ण है कि वाराणसी की आठ विधानसभा सीटों में सात पर भाजपा और एक पर उसकी सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) का प्रतिनिधित्व है। इसके बावजूद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में सपा प्रत्याशी की जीत का अंतर बढ़ना बताता है कि विधानसभा की राजनीतिक ताकत और शिक्षक मतदाताओं का चुनावी व्यवहार अलग-अलग हो सकता है।

जीत के बाद मंडलायुक्त एस. राजलिंगम ने प्रमाण पत्र सौंपा। मतदान के दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। मतगणना पहड़िया मंडी स्थित केंद्र पर हुई। पहली वरीयता के मतों की गणना में लाल बिहारी यादव को 10,958 मत मिले थे जबकि भाजपा प्रत्याशी डॉ. प्रमोद कुमार मिश्रा को 6,060 मत प्राप्त हुए। इसके बाद दूसरी वरीयता के मतों की गणना की गई।अंतिम चरण में सपा प्रत्याशी को 11,612 और भाजपा प्रत्याशी को 6,597 मत मिले।

*शिक्षक एमएलसी चुनाव में सपा की जीत, मुद्दों और संपर्क अभियान की भी परीक्षा*
शिक्षक एमएलसी चुनाव में सपा की जीत, मुद्दों और संपर्क अभियान की भी परीक्षा है। शिक्षक समुदाय के बीच राजनीतिक पहुंच और मुद्दों पर उनके प्रभाव को बढ़ाने में सपा सफल रही है। पिछले चुनाव में शिक्षकों से जुड़े मुद्दों को अपने प्रचार में प्रमुखता दी थी।