सच्ची खबरों से नाराजगी या कानून का खौफ खत्म? पत्रकार आशीष मिश्रा ने एसपी से लगाई सुरक्षा और कार्रवाई की गुहार

पत्रकार को जान से मारने की धमकी का आरोप, निष्पक्ष पत्रकारिता पर दबाव बनाने की कोशिश!

सच्ची खबरों से नाराजगी या कानून का खौफ खत्म? पत्रकार आशीष मिश्रा ने एसपी से लगाई सुरक्षा और कार्रवाई की गुहार

#हरदोई

जनपद में पत्रकारों की सुरक्षा और निष्पक्ष पत्रकारिता की स्वतंत्रता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सच्ची और निष्पक्ष खबरें लिखने की रंजिश में एक पत्रकार को कथित तौर पर फोन पर गाली-गलौज कर जान से मारने की धमकी दिए जाने का मामला सामने आया है। पीड़ित पत्रकार ने पुलिस अधीक्षक हरदोई को आईजीआरएस के माध्यम से शिकायती प्रार्थना पत्र देकर आरोपी के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने, कठोर वैधानिक कार्रवाई करने और अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित कराने की मांग की है।

प्राप्त शिकायत के अनुसार, *गरीबों की जंग हिंदी दैनिक समाचार पत्र* से जुड़े पत्रकार आशीष मिश्रा, पुत्र हरिकरन, निवासी श्यामपुर पंजा, हरदोई ने आरोप लगाया है कि 26 अक्टूबर 2026 को ग्राम चतरखा-वरनई, थाना हरपालपुर निवासी बृजेश कुमार सिंह ने उनके मोबाइल नंबर पर फोन किया। शिकायत में आरोप है कि फोन पर गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी गई। कथित तौर पर आरोपी ने कहा, ?घर पर आ रहा हूं, घर पर आकर मारूंगा।?

पत्रकार का आरोप है कि संबंधित व्यक्ति स्वयं को राष्ट्रीय करणी सेना का उपाध्यक्ष बताता है और संगठन के पद का रौब दिखाकर उन्हें पत्रकारिता से पीछे हटने का दबाव बना रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और पुलिस जांच का निष्कर्ष अभी सामने आना बाकी है।

धमकी की रिकॉर्डिंग होने का दावा, अब पुलिस की कार्रवाई पर निगाहें

शिकायतकर्ता पत्रकार आशीष मिश्रा का कहना है कि कथित धमकी भरे फोन की रिकॉर्डिंग और कॉल डिटेल उनके पास साक्ष्य के रूप में उपलब्ध हैं, जिन्हें मांगने पर पुलिस के समक्ष प्रस्तुत किया जा सकता है। उन्होंने आशंका जताई है कि इस घटना से उन्हें और उनके परिवार को खतरा हो सकता है।

मामला केवल एक पत्रकार और कथित धमकी देने वाले व्यक्ति के बीच विवाद तक सीमित नहीं है। यदि निष्पक्ष खबरों के कारण किसी पत्रकार को धमकाया गया है, तो यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और निर्भीक पत्रकारिता के माहौल से जुड़ा गंभीर विषय है।

अब सवाल पुलिस प्रशासन से!

क्या पत्रकार को धमकी देने के आरोपों की निष्पक्ष जांच कर साक्ष्यों के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की जाएगी? क्या कथित फोन कॉल की रिकॉर्डिंग और अन्य साक्ष्यों की जांच होगी? क्या पत्रकार और उसके परिवार की सुरक्षा को लेकर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे?

अब निगाहें पुलिस अधीक्षक हरदोई पर टिकी हैं। शिकायत पर त्वरित, निष्पक्ष और कानूनसम्मत कार्रवाई से ही स्पष्ट होगा कि जनपद में पत्रकारों की सुरक्षा और कानून के राज को कितनी गंभीरता से लिया जा रहा है।

संदेश साफ है_कलम को धमकी देकर खामोश कराने की कोशिश के आरोपों की जांच होनी चाहिए और दोष सिद्ध होने पर कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। पत्रकार की सुरक्षा और निष्पक्ष पत्रकारिता की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

#रिपोर्ट _ #डी_डी_शुक्ला 

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