कपड़ा व्यापारी के खाते से संदिग्ध यूपीआई ट्रांजेक्शन, दूसरे खाते से भी निकले रुपये; पुलिस और साइबर सेल की जांच पर टिकी निगाहें

आलापुर (अंबेडकरनगर)। जहाँगीरगंज थाना क्षेत्र के मामपुर बाजार में साइबर ठगी का मामला सामने आने से बैंकिंग सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। कपड़ा व्यापारी अरविंद कुमार अग्रहरि ने अपने दो बैंक खातों से करीब एक लाख रुपये की रकम निकलने की शिकायत की है। इंडसइंड बैंक की टांडा शाखा में संचालित खाते से कई संदिग्ध यूपीआई लेनदेन हुए, जबकि यूनियन बैंक की जहाँगीरगंज शाखा के खाते से भी 1,464 रुपये निकलने की बात सामने आई है। त्योहारों के दौरान कारोबार के लिए जुटाई गई पूंजी गंवाने की शिकायत से व्यापारी परेशान हैं। अब उनकी निगाहें पुलिस की कार्रवाई और रकम की वापसी पर टिकी हैं।

ग्राहकों का गोपनीय डेटा ठगों तक कैसे पहुंचा?

मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि साइबर अपराधियों को बैंक खातों और ग्राहकों से जुड़ी जानकारियां कैसे मिलीं। क्या ठगों ने तकनीकी सेंधमारी कर जानकारी हासिल की या किसी अन्य माध्यम से बैंकिंग विवरण तक उनकी पहुंच बनी? क्या ग्राहकों के व्यक्तिगत दस्तावेजों, मोबाइल नंबरों और अन्य गोपनीय जानकारियों का दुरुपयोग हुआ? इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही मिल सकेगा। फिलहाल, किसी डेटा लीक या बैंकिंग तंत्र में सेंधमारी की पुष्टि नहीं हुई है।

बैंक की सुरक्षा व्यवस्था भी जांच के दायरे में
दो अलग-अलग बैंक खातों से रकम निकलने की शिकायत के बाद बैंकिंग सुरक्षा और लेनदेन की निगरानी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यह पता लगाना जरूरी है कि संदिग्ध ट्रांजेक्शन किस माध्यम से किए गए, रकम किन खातों में पहुंची और लेनदेन के दौरान किन डिजिटल जानकारियों का इस्तेमाल हुआ। हालांकि, अभी तक बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत का कोई पुष्ट प्रमाण सामने नहीं आया है। ऐसे में बिना साक्ष्य किसी को जिम्मेदार ठहराने के बजाय बैंकिंग रिकॉर्ड, यूपीआई ट्रांजेक्शन और डिजिटल साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच जरूरी है।

पुलिस की जांच से खुलेगा ठगी का राज
अब निगाहें जहांगीरगंज थाना पुलिस और साइबर सेल की कार्रवाई पर हैं। जांच में संदिग्ध लेनदेन का समय, संबंधित बैंक खाते, यूपीआई आईडी और रकम प्राप्त करने वाले खातों की पड़ताल अहम होगी। साथ ही, ठगी की रकम को आगे स्थानांतरित किए जाने की स्थिति में उसकी पहचान कर नियमानुसार रोक लगाने और वापसी की संभावनाओं पर भी कार्रवाई जरूरी है।

मेहनत की कमाई वापस मिलने का इंतजार
पीड़ित व्यापारी की मांग है कि मामले की गंभीरता से जांच कर साइबर ठगी में शामिल लोगों की पहचान की जाए और उनके खिलाफ कार्रवाई हो। साथ ही, ठगी गई रकम वापस दिलाने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं। कारोबार के लिए जुटाई गई पूंजी निकलने की शिकायत ने व्यापारी की चिंता बढ़ा दी है।

बड़ा सवाल यह है कि ग्राहकों की बैंकिंग जानकारी कितनी सुरक्षित है और संदिग्ध लेनदेन के जरिए रकम निकलने के बाद उसकी वापसी के लिए कितनी तेजी से कार्रवाई होती है। अब देखना होगा कि जांच में साइबर ठगी के तरीकों और रकम के लेनदेन की कड़ियों का पता चलता है या नहीं। मामले में पुलिस की आधिकारिक कार्रवाई और जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही तस्वीर साफ हो सकेगी।