आठ माह से अधिक न्यायालय के बेदखली आदेश को बीत जाने पर स्थानीय प्रशासन कागजों में उलझा रखा न्यायालय के आदेश को पीड़ित का आरोप

ऊंचाहार,रायबरेली।न्यायालय तहसीलदार के बेदखली आदेश का 8 माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी बेदखली आदेश के निष्पादन के नाम पर स्थानीय राजस्व प्रशासन द्वारा की जा रही मात्र कागजी खानापूर्ति (नोटिस तामीली )एवं आदेश के क्रियान्वयन में घोर शिथिलता के विरुद्ध उच्चस्तरीय विधिक कार्यवाही हेतु पीड़ित प्रधान मंत्री से न्याय की गुहार लगाई है।गौरतलब हो कि ग्राम बरसवां मजरे कंदरावा तहसील ऊंचाहार जनपद रायबरेली के अंतर्गत गाटा संख्या 4033/0.0480 हे० नवीन परती (सरकारी भूमि) पर प्रतिपक्षी रामआधार पांडेय पुत्र स्व०राम सजीवन पांडे निवासी बरसवांं मजरे कंदरावा थाना व तहसील ऊंचाहार द्वारा अनाधिकृत रूप से अवैध कब्जा किया गया है।जिसके विरुद्ध राजस्व संहिता की सुसंगत धाराओं के तहत वाद संख्या 1964/2025 कंप्यूटरीकृत वाद संख्या T202510580701964 पंजीकृत कर न्यायालय तहसीलदार द्वारा दिनांक 12/01/2026 को बेदखली एवं क्षतिपूर्ति का अंतिम आदेश पारित किया जा चुका है।उक्त विधिक आदेश को पारित हुए 8 महीने से अधिक समय बीत चुका है।इस संबंध में प्रार्थी द्वारा पूर्व में भी आई.जी.आर.एस. संदर्भ संख्या 60000260219942 दिनांक 27/8/2026 के माध्यम से आवेदन किया गया था किंतु अभी तक स्थानीय तहसील प्रशासन मात्र कागजी औपचारिकता(बार-बार नोटिस तामीली)कर अपनी आख्या पोर्टल पर अपलोड कर देते हैं, जबकि धरातल पर वास्तविक व भौतिक निष्पादन आज तक शून्य है।इस विधिक अवहेलना के संबंध में प्रार्थी द्वारा जिलाधिकारी महोदया जी को भी प्रत्यक्ष व आई.जी.आर.एस. के माध्यम से प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर विधिक कार्यवाही की मांग की गई परंतु आदेश के क्रियान्वयन के संबंध में सिर्फ कागजी खानापूर्ति (नोटिस तामीली)की गई आदेश के क्रियान्वयन के संबंध में निर्देश जारी नहीं किए गए।न्यायालय तहसीलदार के अंतिम आदेश के बावजूद भी नवीन परती (सरकारी भूमि)को मुक्त न कराना उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 एवं माननीय उच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों का खुला उल्लंघन है,जहां उक्त संहिता व उच्च न्यायालय द्वारा बेदखली की कार्यवाही के लिए 3 महीने (90दिन) का समय अवधारित किया गया है।वहीं अब तक 8 महीने से अधिक समय बीत चुका है।जिससे कानून की छवि धूमिल हो रही है।पीड़ित के मामले की विधिक गंभीरता को देखते हुए स्थानीय राजस्व प्रशासन को कड़े एवं बाध्यकारी निर्देश जारी करते हुए नवीन परती भूमि से अवैध कब्जा हटवाने की मांग की है। तहसील प्रशासन रसूखदारों के आगे बौना साबित हो रहा है।