लखनऊ का नया 'गैंगस्टर: एनजीओ की आड़ में करोड़ों के गबन और ISI फंडिंग का सनसनीखेज पर्दाफाश!

लखनऊ का नया 'गैंगस्टर': एनजीओ की आड़ में करोड़ों के घोटाले और दस्तावेजों के गायब होने का बड़ा पर्दाफाश!

 

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के इंदिरा नगर क्षेत्र का रहने वाला व्यक्ति मोहम्मद कामरान निवासी 18/495 इंदिरा नगर लखनऊ पिन कोड 226016 का एक ऐसा हाई-प्रोफाइल मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक हलकों से लेकर सामाजिक और मीडिया जगत तक में भूचाल ला दिया है। मोहम्मद कामरान नामक व्यक्ति पर आरोप है कि उसने एक बड़े एनजीओ की आड़ में करोड़ों-अरबों रुपये का गबन किया है और विकास दीप बिल्डिंग में स्थित कार्यालय से इस एनजीओ के सभी पुराने मैन्युअल दस्तावेजों व फाइलों को सुनियोजित तरीके से गायब करा दिया है।

 

*फर्जी दस्तावेजों और विदेशों से फंडिंग का काला खेल*

सूत्रों के अनुसार, कामरान की यह एनजीओ वर्षों पुरानी है, जो पहले मैन्युअल रूप से संचालित होती थी। जब यह सिस्टम ऑनलाइन हुआ, तो लखनऊ के कई लोगों की शिकायतों के बावजूद उसने पुरानी फाइलों को इसलिए गायब करवा दिया ताकि ISI और आतंकवादियों से मिलने वाली अवैध फंडिंग और विदेशी फंडिंग के राज़ का पर्दाफाश न हो सके। इन गायब दस्तावेजों में एनजीओ के खातों और संदिग्ध लेन-देन का पूरा कच्चा-चिट्ठा था।

 

*विकास दीप बिल्डिंग के अधिकारियों पर भी उठ रहे सवाल*

चूंकि यह एनजीओ विकास दीप बिल्डिंग में स्थित कार्यालय से संचालित होती थी और इसका नीचे ही कार्यालय बना हुआ था, इसलिए वहां के कर्मचारियों और अधिकारियों की संलिप्तता के बिना इतनी बड़ी फाइलें गायब होना असंभव है। इस मामले में रजिस्ट्रार कार्यालय और संबंधित बाबूओं की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए कि आखिर उस नाम की एनजीओ के पुराने कागजात और मैन्युअल फाइलें कहां गईं।

 

*काले कोट की आड़ में खतरनाक सिंडिकेट*

आरोप है कि यह व्यक्ति बेहद शातिर तरीके से काले कोट (वकालत), पत्रकारिता और आरटीआई एक्टिविस्ट होने का मुखौटा पहनकर समाज में घूम रहा है। इसके द्वारा एलडीए (LDA) के फर्जी कागजात, फर्जी मार्कशीट और फर्जी वकालत जैसी अवैध गतिविधियों का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है। इसने कई लोगों के साथ मिलकर एक खतरनाक गैंग बना रखा है, जिसमें कई कथित पत्रकार और अन्य लोग भी शामिल हैं।

 

*एनजीओ को ब्लैकलिस्ट करने और गिरफ्तारी की मांग*

इस गंभीर मामले में आईजीआरएस (IGRS) पोर्टल और अन्य माध्यमों से औपचारिक शिकायतें दर्ज कराई जा रही हैं, जिसमें मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:

 * एनजीओ की तुरंत जांच और निरस्तीकरण: इस संदिग्ध एनजीओ को तत्काल प्रभाव से ब्लैकलिस्ट कर निरस्त किया जाए।

 * दस्तावेजों की रिकवरी और रजिस्ट्रार की जवाबदेही: विकास दीप बिल्डिंग के रजिस्ट्रार और संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया जाए कि एनजीओ की गायब फाइलें कहां हैं।

 

 *कड़ी कानूनी कार्रवाई:*

आतंकवादियों और ISI से फंडिंग लेने वाले इस व्यक्ति और इसके पूरे सिंडिकेट को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाए।